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यशपाल ने लगाया बेशकीमती संपत्तियां निजी हाथों में सौंपने का आरोप

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यशपाल ने लगाया बेशकीमती संपत्तियां निजी हाथों में सौंपने का आरोप


यशपाल ने लगाया बेशकीमती संपत्तियां निजी हाथों में सौंपने का आरोप


नैनीताल, 04 नवंबर (हि.स.)। उत्तराखंड की सरकारी जमीनों और ऐतिहासिक धरोहरों को निजी निवेश के लिए लीज पर देने के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार पर प्रदेश की बेशकीमती सरकारी जमीनें और ऐतिहासिक भवन बड़े होटल समूहों तथा निजी निवेशकों को औने-पौने दामों पर 60 से 90 साल के लिए सौंपने की तैयारी करने का आरोप लगाया है। इसके विरोध में कांग्रेस ने बुधवार को प्रदेशभर में ‘भूमि बचाओ-धामी हटाओ’ अभियान शुरू किया।

दूसरी ओर भाजपा ने ज्योलीकोट में विकास समर्थन सभा आयोजित कर सरकार के फैसले का बचाव किया। भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार जमीनों का स्वामित्व निजी हाथों में नहीं दे रही, बल्कि वर्षों से अनुपयोगी पड़ी संपत्तियों को लीज पर देकर पर्यटन, निवेश और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देना चाहती है।

स्वामित्व और पैमाइश पर सवाल

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने बुधवार को कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य गुरदीप सप्पल, जिला कांग्रेस अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं के साथ पटवाडांगर की 13.64 एकड़ जमीन तथा लोक निर्माण विभाग के ज्योलीकोट स्थित निरीक्षण भवन को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रदेश की प्रचलित बाजार दरों के अनुसार लगभग एक लाख करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीनों और धरोहर संपत्तियों को 60 से 90 साल के लिए निजी हाथों में देने की तैयारी कर चुकी है। कांग्रेस ने प्रदेश के 11 स्थानों पर संबंधित संपत्तियों को रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें बचाने का संकल्प भी लिया।

आर्य ने आरोप लगाया कि सरकारी जमीनों को यूआईआईडीबी और सिडकुल को देने के निर्णय मुख्यमंत्री ने अकेले लिए हैं, जबकि उनके अनुसार ऐसे निर्णय मंत्रिमंडल की सामूहिक शक्तियों के दायरे में आने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि सरकारी दस्तावेजों के अनुसार लगभग 1,232 एकड़ भूमि यूआईआईडीबी और सिडकुल को देने के प्रस्ताव स्वीकृत हो चुके हैं, जबकि लोक निर्माण विभाग के 25 निरीक्षण भवनों को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा लगभग 560 एकड़ भूमि देने की कार्यवाही जारी है।

पटवाडांगर की जमीन के संबंध में नेता प्रतिपक्ष ने सरकारी अभिलेखों में विरोधाभास होने का आरोप लगाया। उनके अनुसार अक्टूबर 2023 की बैठक में इस जमीन को जैव प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर से संबंधित बताते हुए लगभग 60 एकड़ बताया गया। जून 2024 में इसे कृषि एवं उद्यान विभाग की 80 एकड़ भूमि, जनवरी 2025 के शासनादेश में कृषि विभाग की 103 एकड़ भूमि और अगस्त 2025 की बैठक में जैव प्रौद्योगिकी परिषद स्थित भूमि बताया गया।

सितंबर 2025 की अधिसूचना में इसका रकबा 108 एकड़ दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि कुमाऊं विश्वविद्यालय के लिए भी अलग-अलग दस्तावेजों में कभी 30, कभी 15 और कभी 26.4 एकड़ भूमि का उल्लेख है।

आर्य ने आरोप लगाया कि 15 जनवरी 2025 के शासनादेश में पटवाडांगर की 103 एकड़ भूमि को कृषि विभाग के स्वामित्व वाली बताकर उसमें से 23 एकड़ भूमि प्रीमियम रिसॉर्ट के लिए यूआईआईडीबी को दे दी गई, जबकि उस समय जमीन की पैमाइश और अभिलेख उपलब्ध नहीं थे। उनके अनुसार सितंबर 2025 में राजस्व विभाग ने गांव का सर्वेक्षण और अभिलेख तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की।

राजस्व परिषद ने 9 सितंबर 2025 को जिलाधिकारी नैनीताल को लिखे पत्र में 108 एकड़ भूमि को वन एवं राजस्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज नहीं होने की बात कही थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जमीन का स्वामित्व ही स्पष्ट नहीं था तो उसे कृषि विभाग की बताकर किसी अन्य संस्था को कैसे सौंप दिया गया।

सीवर ट्रीटमेंट व ऐतिहासिक भवनों का मुद्दा भी उठाया

नेता प्रतिपक्ष ने नैनीताल शहर के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का मामला उठाते हुए कहा कि जिलाधिकारी ने पटवाडांगर के अलावा अन्यत्र जमीन उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी थी और यह परियोजना एशियाई विकास बैंक की योजना में भी चयनित थी। इसके बावजूद अगस्त 2025 में होटल परियोजना पर विपरीत प्रभाव पड़ने का हवाला देते हुए सीवर प्लांट को वन भूमि पर ले जाने के निर्देश दिए गये। उन्होंने दावा किया कि पटवाडांगर की 13.64 एकड़ जमीन 90 साल के लिए 37.80 करोड़ रुपये के रिजर्व मूल्य और पांच रुपये प्रति वर्गमीटर सालाना किराये पर दी जा रही है, जबकि इसका बाजार मूल्य लगभग 82 करोड़ रुपये है।

आर्य ने कहा कि पटवाडांगर में अंग्रेजों के समय से देश का प्रमुख वैक्सीन संस्थान रहा है। इसके साथ ही वर्ष 1871 में बने ज्योलीकोट निरीक्षण भवन, वर्ष 1899 में बने रामगढ़ निरीक्षण भवन, कैंचीधाम मार्ग पर वर्ष 1878 के रातीघाट निरीक्षण भवन और वर्ष 1866 के रानीबाग निरीक्षण भवन सहित कई ऐतिहासिक संपत्तियां भी निजी हाथों में देने की सूची में शामिल हैं। उन्होंने रामगढ़ की 15 एकड़ भूमि, एचएमटी रानीबाग की 53 एकड़ भूमि और कॉर्बेट की सीमा से लगे पाटकोट की 37 एकड़ भूमि का भी उल्लेख किया।

उन्होंने डाकपत्थर, पाटकोट और धनौल्टी-मगरा की जमीनों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कई स्थानों पर बंदोबस्त, खसरा संख्या, पैमाइश और भूमि मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही जमीन देने के निर्णय लिए जा रहे हैं। आर्य ने यह भी कहा कि सरकार एक ओर क्षतिपूरक वनीकरण के लिए जमीन उपलब्ध नहीं करा पा रही है और भूमिहीन गरीब परिवारों को आवास देने के लिए भी भूमि की कमी बताती है, वहीं दूसरी ओर बड़ी मात्रा में सरकारी जमीन निजी निवेश के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने इसे गरीबों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के परिवारों के हितों के विपरीत बताया।

कांग्रेस नेता ने जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की 142 एकड़ जमीन लगभग एक करोड़ रुपये सालाना किराये पर निजी कंपनी को देने का मामला भी उठाया। उन्होंने सरकार से सभी निविदाएं निरस्त करने, यूआईआईडीबी को दी गई जमीनें संबंधित विभागों को लौटाने, 22 दिसंबर 2022 के कैबिनेट निर्णय को वापस लेने और जॉर्ज एवरेस्ट की लीज निरस्त करने की मांग की। साथ ही पूरे मामले की उच्च न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग भी की।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी