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बिना मान्यता धार्मिक शिक्षा संचालित करने वाले संस्थानों को एक सप्ताह में मान्यता लेने के निर्देश

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बिना मान्यता धार्मिक शिक्षा संचालित करने वाले संस्थानों को एक सप्ताह में मान्यता लेने के निर्देश


हरिद्वार, 24 सितंबर (हि.स.)। उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने गुरुवार को बहादराबाद ब्लॉक क्षेत्र के विभिन्न मदरसों एवं अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों का निरीक्षण कर मान्यता, संचालन व्यवस्था और विद्यार्थियों के शैक्षिक हितों की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान बिना प्राधिकरण की मान्यता के धार्मिक शिक्षा संचालित किए जाने का मामला सामने आने पर संबंधित संस्थानों को एक सप्ताह के भीतर आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर मान्यता लेने के निर्देश दिए गए।

निरीक्षण में मदरसा इस्लामिया तालीमुल कुरान, भारापुर भोरी रुड़की तथा फलाहे दारैन मॉडर्न स्कूल, भोरी रुड़की में शिक्षा विभाग की मान्यता मिली, लेकिन दोनों संस्थानों के पास अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की मान्यता नहीं थी। धार्मिक शिक्षा संचालित होने के दृष्टिगत अध्यक्ष ने दोनों संस्थानों को प्राधिकरण से आवश्यक मान्यता प्राप्त करने और बिना मान्यता धार्मिक शिक्षा का संचालन नहीं करने के निर्देश दिए।

इसके अलावा गढ़मीरपुर और दादूपुर गोविंदपुर क्षेत्र के अन्य मदरसों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। बंद हो चुके संस्थानों में अध्ययनरत बच्चों को मान्यता प्राप्त विद्यालयों एवं मदरसों में स्थानांतरित किए जाने की जानकारी ली गई, ताकि किसी भी बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो। एक संस्था ने स्वेच्छा से अपनी मान्यता सरेंडर की है, जबकि एक अन्य संस्था ने शिक्षा विभाग से मान्यता के लिए आवेदन किया है।

डॉ. गांधी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना प्राधिकरण की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई किसी संस्था या समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि बच्चों के शैक्षिक अधिकार, संस्थानों की जवाबदेही और उनके बेहतर भविष्य को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही है।

उन्होंने कहा कि नई पहचान, नया सम्मान की भावना के साथ अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और तकनीक-सक्षम शिक्षा व्यवस्था से जोड़ा जाएगा, ताकि बच्चे भविष्य के उत्तराखंड के निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकें।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला