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नैनीताल एवं चम्पावत वन प्रभाग के कार्मिकों को ‘रेडियो टेलीमेट्री’ का प्रशिक्षण

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नैनीताल एवं चम्पावत वन प्रभाग के कार्मिकों को ‘रेडियो टेलीमेट्री’ का प्रशिक्षण


नैनीताल, 06 मई (हि.स.)। मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए नैनीताल एवं चम्पावत वन प्रभाग के कार्मिकों के लिए ‘रेडियो टेलीमेट्री’ विषय पर विशेष कार्यशाला एवं प्रदर्शन सत्र आयोजित किया गया। यह कार्यशाला नैनीताल चिड़ियाघर सभागार में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया एवं नैनीताल वन प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुई।

कार्यशाला में डॉ. जी. अरिंद्रन एवं डॉ. मेराज अनवर ने वन कर्मियों को बाघों एवं अन्य वन्यजीवों की निगरानी के लिए ‘रेडियो टेलीमेट्री’ तकनीक की जानकारी दी। कार्यक्रम में लगभग 50 वनकर्मियों ने सहभागिता की। विशेषज्ञों ने बताया कि ‘ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन-2022’ के अनुसार पश्चिमी सर्किल क्षेत्र में 200 से अधिक बाघ चिन्हित किए गए थे, जो नैनीताल एवं चम्पावत वन प्रभाग से जुड़े क्षेत्र हैं। हाल के वर्षों में मानव-बाघ एवं तेंदुआ संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिसके नियंत्रण में ‘रेडियो टेलीमेट्री’ उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

कार्यशाला में बाघों की पारिस्थितिकी, व्यवहार, रेडियो कॉलर, सैटेलाइट टैग, एंटीना, रिसीवर एवं डेटा विश्लेषण की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही वन्यजीव अनुसंधान से जुड़े कानूनी एवं सुरक्षा पहलुओं पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बाघों पर नजर रखने के लिये प्रयोग होने वाले रेडियो कॉलर एवं मॉनिटरिंग उपकरणों का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी