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जयंती पर प्रकृति के चितेरे कवि बर्त्वाल का भावपूर्ण स्मरण

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जयंती पर प्रकृति के चितेरे कवि बर्त्वाल का भावपूर्ण स्मरण


नई टिहरी, 20 अगस्त (हि.स.)। प्रकृति के चितेरे कवि स्व. चंद्र कुंवर बर्त्वाल की 107 वीं जयंती वीरवार को चंबा के विजन इंस्टीट्यूट आफ होटल मैनेजमेंट संस्थान में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। मुख्य वक्ता साहित्यकार सोमवारी लाल सकलानी ने स्व. बर्त्वाल की जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि वह लंबी उम्र जीवन जीते तो, विश्व कवि विलियम वर्ड्सवर्थ और प्रकृतिवादी कवि स्व. सुमित्रा नंदन पंत से भी आगे निकल चुके होते।

कहा चंद्र कुंवर एक सुंदर मन और आत्मा के कवि थे। छायावादोत्तर चेतना और भारतीय चिंतन की धारा के मूर्धन्य कवि थे। उनका कवित्व झरने के प्रवाह की भांति बहने वाला था। निराशा के आगोश में भी वे आशावादी रहे और ऋषि-मुनियों जैसी उनकी सौम्यता थी। महाकवि कालिदास और निराला जैसे कवियों की उनके दिल-दिमाग पर छाप थी। अत्यंत सरल और सरस व्यक्तित्व के धनी चंद्रकुंवर हिंदी साहित्य को अमूल्य धरोहर देकर चले गए।

बताया कि 20 अगस्त 1919 को उनका जन्म मालकोटी (रुद्रप्रयाग) में हुआ था। उनकी कविताएं सरस्वती, विशाल भारत, चांद, प्रतीक क्षत्रिय वीर आदि शामिल हैं। इस मौके पर प्रधानाचार्य आरसी बहुगुणा, निदेशक प्रदीप कोठारी

वैष्णवी, दिया, सोनाली शामिल रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश रतूड़ी