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घर-गृहस्थ में रहकर महापुरुष बनना कठिन: दशरथ

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घर-गृहस्थ में रहकर महापुरुष बनना कठिन: दशरथ


हरिद्वार, 13 अप्रैल (हि.स.)। रानीपुर मोड़ स्थित श्रीहरि द्वार आश्रम में चल रहे सत्संग कार्यक्रम में महात्मा दशरथ दास ने कहा कि मुक्ति और अमरता की प्राप्ति घर-परिवार में रहकर संभव नहीं है। यह कार्यक्रम सदानन्द तत्त्वज्ञान परिषद् के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है, जिसकी स्थापना संत ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द परमहंस द्वारा की गई है।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सच्चा संत कभी भी व्यक्ति को गृहस्थ जीवन में रहकर आध्यात्मिक सर्वोच्चता प्राप्त करने की अनुमति नहीं देता। उनके अनुसार इतिहास में जितने भी महापुरुष हुए हैं, उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर ही उच्च स्थान प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने गौतम बुद्ध, महावीर स्वामी, गुरु नानक देव जैसे महापुरुषों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन सभी ने समाज में पूजनीय स्थान प्राप्त करने के लिए गृहस्थ जीवन से दूरी बनाई।

महात्मा दशरथ दास ने यह भी कहा कि सांसारिक उपलब्धियां हासिल करने के लिए भी व्यक्ति को घर से दूर रहकर कठिन परिश्रम करना पड़ता है। उन्होंने संतों की महिमा बताते हुए कहा कि सच्चा संत समाज की कठिन से कठिन परिस्थितियों को सहज बना सकता है और उसके पास अद्भुत आध्यात्मिक शक्ति होती है। साथ ही उन्होंने उन लोगों की आलोचना की जो संत का वेश धारण कर केवल जीवनयापन के लिए कार्य करते हैं। उनके अनुसार ऐसे लोग वास्तविक संत नहीं, बल्कि आडम्बरी और पाखंडी होते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सत्संग का लाभ उठाया।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला