गुरुकुल में डॉ. बुद्धा का वैदिक रीति से किया स्वागत
हरिद्वार, 02 अप्रैल (हि.स.)। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के दैनिक यज्ञ कार्यक्रम में गुरुवार को ऑल इण्डिया काउंसिंल फॉर टेक्निक एजूकेशन (एआईसीटीई), नई दिल्ली के मुख्य समन्वय अधिकारी डा. बुद्धा चन्द्रशेखर सम्मिलित हुए।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा ने कहा कि वेद और श्रीमद् भागवत गीता मनुष्य को निष्काम कर्मयोग की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति के लक्ष्य पवित्र हों तो उन्हें प्राप्त करना सरल हो जाता है। कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि गुरुकुल एक पावन भूमि है, जो पिछले सवा सौ वर्षों से राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करने के उद्देश्य से शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर योगदान दे रही है।
मुख्य अतिथि डॉ. बुद्धा चन्द्रशेखर ने कहा कि गुरुकुल की पुण्य भूमि पर आकर उन्हें सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और वे तकनीक के माध्यम से भाषा की सीमाओं को समाप्त करने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि माँ, मातृभूमि और मातृभाषा का ऋण कभी नहीं चुकाया जा सकता, और यही भावना भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में अग्रसर करती है।
कार्यक्रम में एफईटी के डीन प्रो. मयंक अग्रवाल ने डॉ. बुद्धा चन्द्रशेखर के शैक्षणिक एवं तकनीकी योगदानों की जानकारी दी। इस अवसर पर यज्ञ ब्रह्मा डॉ. वेदव्रत, डॉ. अंकित सैनी, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. उधम सिंह, डॉ. सुशील कुमार, डॉ. संदीप कुमार, समीर राणा सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

