स्वर में निष्ठा, शास्त्र का ज्ञान और समय की जब हो सही समझ तो कला देती है जीवन को दिशा : हरीश भिमानी
कानपुर, 06 अक्टूबर (हि.स.)। जब स्वर में निष्ठा, शास्त्र का ज्ञान और समय की सही समझ मिलती है तो कला केवल मनोरंजन नहीं रह जाती, बल्कि जीवन को दिशा देने का माध्यम बन जाती है। यह बातें मंगलवार को प्रसिद्ध वॉइस आर्टिस्ट हरीश भिमानी ने सीएसजेएमयू में आयोजित ‘स्वर, शास्त्र और समय’ कार्यक्रम में कहीं।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में ‘श्रीमद्भगवद्गीता, वैदिक वाङ्मय शोधपीठ’ और स्कूल ऑफ क्रिएटिव एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स के संयुक्त तत्वावधान में वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई सभागार में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हरीश भिमानी ने भारतीय संस्कृति में ध्वनि और स्वर के वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर विचार रखे।
उन्होंने धारावाहिक महाभारत में सूत्रधार ‘समय’ के रूप में अपनी आवाज की यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि समय केवल एक शब्द या पात्र नहीं, बल्कि जीवन का सबसे बड़ा सत्य है। युवाओं को भारतीय शास्त्रों, ध्वनिशास्त्र और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना आज की आवश्यकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने की। उन्होंने कहा कि महाभारत में ‘मैं समय हूं’ के स्वर के माध्यम से हरीश भिमानी ने देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। ऐसे विलक्षण स्वर के धनी व्यक्तित्व का विश्वविद्यालय में आना सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि स्वर, शास्त्र और ज्ञान का संगम होने पर वह कालजयी बन जाता है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के विकास के लिए जरूरी हैं।
इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स के निदेशक डॉ. मिठाई लाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि स्वर में शब्दों के माध्यम से किसी कहानी और भाव का चित्र श्रोता के मन में साकार करने की शक्ति होती है।
कार्यक्रम में गीता शोधपीठ के संस्थापक सदस्य डॉ. उमेश पालीवाल, निदेशक प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी, सह-निदेशक अनिल कुमार गुप्त, मीडिया प्रभारी डॉ. दिवाकर अवस्थी समेत शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

