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समझौतों की अवहेलना और उत्पीड़न से बिजली कर्मियों में असंतोष बढ़ा : विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति

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समझौतों की अवहेलना और उत्पीड़न से बिजली कर्मियों में असंतोष बढ़ा : विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति


लखनऊ, 08 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने साेमवार काे कहा कि ऊर्जा क्षेत्र के कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए हुए लिखित समझौतों का आज तक पूर्ण पालन न होने से बिजली कर्मियों में व्यापक असंतोष व्याप्त है। साथ ही आंदोलन के दौरान एवं उसके बाद की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस न लिए जाने से कर्मचारियों में गहरी नाराजगी है। संघर्ष समिति ने कहा कि यह स्थिति पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।

संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने सोमवार को बताया कि बिजली कर्मियों की ज्वलंत समस्याओं के समाधान के लिए 03 दिसंबर 2022 को ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा एवं संघर्ष समिति के बीच एक महत्वपूर्ण लिखित समझौता हुआ था। यह समझौता मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, आईएएस (से0नि0) की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में संपन्न हुआ था। किंतु अत्यंत खेद का विषय है कि इस समझौते के अधिकांश बिंदुओं को आज तक लागू नहीं किया गया।

उन्होंने बताया के समिति के पदाधिकारियों ने कहा है कि समझौते के क्रियान्वयन में हो रही लगातार देरी के कारण कर्मचारियों को मार्च 2023 में सांकेतिक आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ा। इसके बावजूद समस्याओं का समाधान करने के स्थान पर कर्मचारियों के विरुद्ध विभिन्न प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां की गईं।

संघर्ष समिति ने स्मरण कराया कि 19 मार्च 2023 को पुनः ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था। उस समय ऊर्जा मंत्री ने तत्कालीन अध्यक्ष, पावर कॉरपोरेशन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आंदोलन के कारण की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाएं, दर्ज कराई गई एफआईआर समाप्त की जाएं तथा हटाए गए सभी संविदा कर्मचारियों को पुनः सेवा में बहाल किया जाए। दुर्भाग्यवश इन निर्देशों का भी आज तक समुचित पालन नहीं किया गया है।

संघर्ष समिति ने कहा कि न तो 03 दिसंबर 2022 के समझौते का पूर्ण क्रियान्वयन हुआ है और न ही 19 मार्च 2023 को हुए समझौते एवं ऊर्जा मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुपालन किया गया है। इससे पूरे प्रदेश के बिजली कर्मचारियों में गहरा असंतोष और निराशा व्याप्त है।

संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश के बिजली कर्मी मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व एवं निर्देशों पर पूर्ण विश्वास रखते हैं। यही कारण है कि उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों का सामना करने के बावजूद भीषण गर्मी के इस कठिन दौर में वे प्रदेश की जनता को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य कर रहे हैं। संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से मांग की है कि वह अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने तथा औद्योगिक सौहार्द कायम रखने के लिए मार्च 2023 के आंदोलन से संबंधित तथा उसके बाद की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को तत्काल प्रभाव से वापस ले। साथ ही 03 दिसंबर 2022 एवं 19 मार्च 2023 के समझौतों के सभी बिंदुओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा