श्रमदान से स्वच्छता का संकल्प, मणिकर्णिकाघाट की गरिमा बढ़ाने का संदेश
नगर निगम और नमामि गंगे ने तीर्थों की पवित्रता को बनाए रखने का किया आह्वान
वाराणसी,05 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद में गंगा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच सोमवार को नगर निगम और नमामि गंगे की टीम ने मणिकर्णिकाघाट तीर्थ पर स्वच्छता सेवा अभियान में श्रमदान कर तीर्थ की गरिमा बढ़ाने का संदेश दिया।
स्वच्छता अभियान में शामिल गंगा सेवक राजेश शुक्ल ने बताया कि मणिकर्णिका तीर्थ पर श्रमदान करते समय ऐसा अनुभव होता है कि बाबा महादेव स्वयं सहायक हैं, यहां की आध्यात्मिक और दिव्य ऊर्जा का सीधा प्रभाव है। मणिकर्णिका घाट पर नगर निगम की टीम के साथ श्रमदान महाश्मशान की पवित्रता को बनाने में सहायक है। काशी का यह मणिकर्णिका घाट केवल अंतिम संस्कार का स्थल नहीं, बल्कि जीवन और मोक्ष का द्वार माना जाता है। यहां सेवा करना अपने आप में सबसे बड़ा सत्कर्म है।
हिन्दू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस महाश्मशान पर शिव की उपस्थिति है। स्वयं भगवान शिव तारक मंत्र देते हैं, इसलिए यहां श्रमदान या जनसेवा करने वाले को आंतरिक शक्ति और अलौकिक शांति की अनुभूति होती है, मानो महादेव हर पल मार्गदर्शन और सहायता कर रहे हों। इस पवित्र भूमि पर किया गया श्रम अहंकार को मिटाकर विशुद्ध भक्ति और समर्पण का भाव जगाता है और कर्म का एहसास कराता है।
गंगा सेवक ने कहा कि मणिकर्णिका घाट की दिव्यता और यहां आने वाले श्रद्धालुओं में श्रमदान व सेवा का भाव इस पवित्र तीर्थ की गरिमा को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। मणिकर्णिका घाट सनातन धर्म में केवल एक श्मशान या घाट नहीं है, बल्कि इसे महाश्मशान और मुक्ति का द्वार माना गया है। मणिकर्णिका घाट पर देश-विदेश से लोग आते हैं। यहां निरंतर होने वाले दाह-संस्कार के बीच स्वच्छता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। जब तक हर नागरिक और श्रद्धालु में श्रमदान (स्वैच्छिक सफाई और सेवा) का भाव नहीं जागेगा, तब तक इस स्थान की पवित्रता को बाहरी रूप से बनाए रखना कठिन है।
गंगा सेवक ने कहा कि यह स्थान जीवन और मृत्यु के परम सत्य का बोध कराता है। यहां कचरा न फैलाना, घाट की मर्यादा का पालन करना और रीती-रिवाजों का सम्मान करना हर दर्शनार्थी का कर्तव्य है। प्रशासन के प्रयासों के साथ-साथ स्थानीय निवासियों, नाविकों और तीर्थयात्रियों का श्रमदान में भाग लेना घाट की दिव्यता को कई गुना बढ़ा देता है। सेवा भाव से किया गया कार्य ही किसी तीर्थ को जीवंत रखता है।---------------
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

