शोध में मौलिकता और ईमानदारी जरूरी : डॉ. सुभासिस दान
कानपुर, 22 सितंबर (हि.स.)। शोध कार्य तभी सार्थक होता है, जब उसे ईमानदारी और मौलिकता के साथ लिखा जाए। शोधार्थियों को प्रभावी शोध पत्र तैयार करने के साथ साहित्यिक चोरी से बचने के लिए सही संदर्भों और आधुनिक सॉफ्टवेयर का उपयोग करना चाहिए। यह बातें मंगलवार को अतिथि व्याख्यान में डॉ. सुभासिस दान ने कहीं।
गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के प्रसूति विभाग में शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए विशेष अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया। इसका विषय ‘‘मैनुस्क्रिप्ट कैसे लिखें और प्लेजियारिज्म (साहित्यिक चोरी) से कैसे बचें’’ रहा। डॉ. सुभासिस दान ने शोध पत्र लेखन की प्रक्रिया समझाते हुए टाइटल, एब्स्ट्रैक्ट, इंट्रोडक्शन, मेथडोलॉजी, रिजल्ट और डिस्कशन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शोध पत्र की भाषा सरल, वैज्ञानिक और मौलिक होनी चाहिए।
उन्होंने प्लेजियारिज्म के विभिन्न प्रकार, इसके दुष्परिणाम और इससे बचने के तरीकों की जानकारी दी। साथ ही संदर्भों के प्रबंधन के लिए जोतरो और मेंडले तथा साहित्यिक चोरी की जांच के लिए टर्निटिन और अर्वकुंड जैसे सॉफ्टवेयर के उपयोग की सलाह दी।
विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा द्विवेदी ने कहा कि शोधार्थियों के लिए शोध पत्र लेखन और साहित्यिक चोरी से बचाव की सही जानकारी बेहद जरूरी है। ऐसे व्याख्यान विद्यार्थियों को शोध की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए इस तरह के उपयोगी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। डॉ. सीमा द्विवेदी ने डॉ. सुभासिस दान का आभार व्यक्त किया। संचालन डॉ. प्रतिमा वर्मा ने किया। इस अवसर पर डॉ. नीना गुप्ता, डॉ. रेनू गुप्ता, डॉ. शैली अग्रवाल, डॉ. बंदना शर्मा, डॉ. पाविका लाल, डॉ. प्रीती, डॉ. उरुज़ जहां, डॉ. दिव्या द्विवेदी समेत वरिष्ठ सदस्य, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

