शिक्षा को कौशल, रोजगार और राष्ट्र निर्माण से जोड़ना जरूरी : राकेश कुमार मिश्रा
कानपुर, 20 सितंबर (हि.स.)। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री या जानकारी हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में कौशल, चरित्र, जिम्मेदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना होना चाहिए। बदलती तकनीक और रोजगार की जरूरतों के बीच शिक्षा को उद्योग, कौशल विकास और समाज की आवश्यकताओं से जोड़ना जरूरी है। यह बातें छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा ने दो दिवसीय उत्तर प्रदेश ज्ञान सभा के समापन सत्र में कहीं।
सीएसजेएमयू और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ज्ञान सभा के दूसरे दिन शिक्षा को कौशल, रोजगार, उद्योग और राष्ट्र के विकास से जोड़ने पर विभिन्न सत्रों में मंथन हुआ। पहले सत्र में शिक्षा के उद्देश्य और क्षमता विकास पर चर्चा हुई। मुख्य अतिथि तन्मय तिवारी ने कहा कि शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों में क्षमता विकास होना चाहिए। ज्ञान का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका उपयोग व्यवहारिक जीवन में किया जाए। मुख्य वक्ता डॉ. हरेश प्रताप सिंह ने करके सीखने पर जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव भी दिया जाना चाहिए।
दूसरे सत्र में शिक्षा और उद्योग के बीच समन्वय पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा केवल नौकरी हासिल करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास भी जरूरी है। डॉ. अतुल कोठारी ने बदलती जरूरतों के अनुरूप कौशल आधारित शिक्षा को आवश्यक बताया।
तीसरे सत्र में उत्तर प्रदेश की स्कूली शिक्षा की दशा और दिशा पर विचार हुआ। प्रो. अनुराग त्रिपाठी ने विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने, उनकी प्रतिभा के अनुरूप अवसर देने और शिक्षा को व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया। मेजर हर्ष कुमार ने जुनून के साथ अनुशासन को जरूरी बताया। मातृभाषा में शिक्षा, शिक्षक की भूमिका और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर भी चर्चा हुई।
समापन सत्र में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सुरेश कुमार गुप्ता ने ज्ञान सभा के उद्देश्य और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन की दिशा में न्यास के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने स्थानीय शिक्षाविदों और संस्थानों के साथ मिलकर काम करने पर जोर दिया। संजय स्वामी ने आयोजन की स्वच्छता और व्यवस्थाओं की सराहना की। समापन अवसर पर कजरी, सोहर, लोकगीत, भजन और सांस्कृतिक नृत्यों की प्रस्तुतियों के साथ भव्य सांस्कृतिक संध्या हुई। इससे दो दिवसीय ज्ञान सभा का समापन हुआ।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

