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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पहली बार आए हमीरपुर, सनातनियों ने किया स्वागत

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पहली बार आए हमीरपुर, सनातनियों ने किया स्वागत


एतिहासिक पतालेश्वर मंदिर परिसर पर शंकराचार्य को देखने और आर्शीर्वाद लेने के लिए सनातनियों का उमड़ा सैलाब

हमीरपुर, 28 मई (हि.स.)। जगतगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शंकराचार्य के गुरुवार को देर शाम उत्तर प्रदेश के हमीरपुर शहर के यमुना नदी किनारे एतिहासिक पतालेश्वर मंदिर में पहली बार आगमन पर सनातनियों ने उनका जोरदार स्वागत किया। हालांकि सूर्यास्त होने पर उन्होंने मौन धारण कर लिया है, लेकिन इशारों में ही शंकराचार्य ने सनातनियों को आर्शीर्वाद दिया है।

एतिहासिक पतालेश्वर मंदिर में शंकराचार्य के आगमन को लेकर पिछले दो दिनों से तैयारी चल रही थी। अखिल भारत ब्राम्हण एकता परिषद के संस्थापक सेवानिवृत्त डीआईजी जुगुल किशोर तिवारी के निर्देश पर रमाकांत शुक्ला, महिला मोर्टा की जिलाध्यक्ष दीपा तिवारी, बालजी पांडेय समेत तमाम सनातनी लोगों ने मंदिर परिसर को सजाया था।

गुरुवार को दोपहर 12 बजे शंकराचार्य के आने का कार्यक्रम तय था। सुबह से ही भीषण गर्मी में भी बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुषों ने कार्यक्रम स्थल पर डेरा जमा लिया था, लेकिन शाम तक शंकराचार्य नहीं आए। देर शाम साढ़े सात बजे के बाद शंकराचार्य का काफिला हमीरपुर शहर की सीमा पर पहुंचा तो बड़ी तादाद में लोगों ने उनका स्वागत किया। भारी पुलिस फोर्स के बीच शंकराचार्य काफिले के साथ बस स्टाप होते हुए अमनशहीद पहुंचे, तो यहां जाम की स्थिति पैदा हो गई। पुलिस ने ट्रैफिक रोककर शंकराचार्य के काफिले के लिए रास्ता आसान किया।

पतालेश्वर मंदिर परिसर पहुंचते ही उनके सम्मान में गर्मजोशी से नारे लगाए गए। शंकराचार्य को तुलसी की माला पहनाकर कार्यक्रम के आयोजकों ने प्रणाम किया। एक महिला ने अपनी बच्ची को शंकराचार्य के पास ले गई और उसका नाम रखने की विनती की। शंकराचार्य ने बच्ची का नाम लिखकर शिवांगी रखा।

शंकराचार्य के शिष्यों ने कहा कि सनातन संस्कृति की आत्मा है। जो सनातनियों को गौरक्षा धर्म के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सूर्यास्त होते ही शंकराचार्य मौन व्रत में चले गए है। बता दें कि देर रात शंकराचार्य महोबा के लिए प्रस्थान करेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज मिश्रा