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वीथिका के आयोजन ‘पीढ़ियां’ में शामिल हुए विख्यात साहित्यकार

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वीथिका के आयोजन ‘पीढ़ियां’ में शामिल हुए विख्यात साहित्यकार


--सूर्यबाला, मनोज रूपड़ा, आकृति विज्ञा, बसंत त्रिपाठी, जनार्दन, रजनीश त्रिवेदी को मिला वीथिका सम्मान

--आकृति की कविताओं में स्त्री संस्कृति की संवाहिका: शिशिर सोमवंशी

--महानगरीय जीवन की विडम्बनाओं के भाष्यकार हैं मनोज रूपड़ा: बसंत त्रिपाठी

प्रयागराज, 15 मार्च (हि.स)। प्रयागराज की वीथिका संस्था के अनूठे साहित्यिक आयोजन ‘पीढ़ियां’ में देश के विख्यात साहित्यकार और आलोचक शामिल हुए। साहित्यकारों की तीन पीढ़ियों पर केंद्रित वीथिका का कार्यक्रम इलाहाबाद संग्रहालय में हुआ। जिसमें साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया, लेखन प्रक्रिया के बारे में बताया और उन पर विद्वान आलोचकों ने विमर्श किया। इस अवसर पर सूर्यबाला (मुम्बई), मनोज रूपड़ा (नागपुर), आकृति विज्ञा (वाराणसी), बसंत त्रिपाठी, जनार्दन, रजनीश त्रिवेदी (कानपुर), रंगकर्मी प्रवीण शेखर को वीथिका सम्मान दिया गया।

इस अवसर पर आकृति विज्ञा ने अपने तीन कविता संग्रहों से कुछ कविताएं पढ़ी और कहा साहित्य का मौलिक तत्व समाज हित है। उन्होंने कहा कि इस समय सहनशीलता का काम होना चिंता का विषय है। प्रगतिवाद अपने समय की अनकही बातों को कहता है।

आकृति विज्ञा की कविताओं पर सुपरिचित कवि और समालोचक डॉ. शिशिर सोमवंशी ने कहा कि आकृति की रचनाओं में संवेदना और शिल्प का एक बहुत ही सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। वे स्त्री के अस्तित्व को लोक के पारम्परिक प्रतीकों से जोड़ती हैं, लेकिन उसे आधुनिक चेतना के साथ प्रस्तुत करती हैं। उनकी कविताओं में स्त्री केवल एक पात्र नहीं, बल्कि संस्कृति की संवाहिका है। प्रकृति के प्रति उनका गहरा लगाव भी उनके रचनाकर्म का सशक्त पक्ष है। वे प्रकृति को केवल पृष्ठभूमि के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत पात्र के रूप में चित्रित करती हैं।

मनोज रुपड़ा ने कहा कोई युवा जब लिखना शुरू करता है तो उसके पास स्वतः स्फूर्त प्रेरणा के अलावा कुछ नहीं होता। उसे लिखने के लिए ज्यादा सोचना नहीं पड़ता क्योंकि वह उत्साह से भरा होता है और तात्कालिक प्रवाह उसे लिखवा लेता है। यही वजह है कि युवा लेखक की रचनाओं में आपको विद्रोह, नए विचार और कल्पना अधिक दिखाई देगी। वह किसी दूरगामी लक्ष्य के बजाय तत्काल नतीजे पर यकीन करता है। वह जो भी लिखता है, दुनिया को बदलने की बेचैनी के साथ लिखता है। उसकी भाषा हमेशा तेज, प्रयोगधर्मी और भावनात्मक होती है।

मनोज रूपड़ा के कथा संसार पर सुपरिचित कवि व आलोचक प्रो. बसंत त्रिपाठी ने कहा कि समकालीन कथा साहित्य में मनोज रूपड़ा की कहानियाँ मनुष्य के भीतर के अंधेरे का उत्खनन है। इस उत्खनन के कबाड़ को जीता हुआ मनुष्य और उसके क्रिया कलापों की बारीकियों को दर्ज़ करता हुई एक सचेत कथाकार। इसलिए अपने पहले संग्रह के बाद से ही मनोज रूपड़ा समकालीन यथार्थ की विडंबनाओं के प्रति ज्यादा बेपरवाह होते दिखाई पड़ते हैं। राजनीतिक क्रूरताओं, सामाजिक विचलन और इसके संसर्ग में आकार लेता हुआ मनुष्य और उसकी जिजीविषा व पराभव उनकी कहानियों का केंद्रबिन्दु है। वे ग्रामीण विडम्बनाओं के नहीं नगर और महानगरीय जीवन की विडम्बनाओं के भाष्यकार हैं। वे जीवन की सहजता के नहीं उसकी जटिलताओं के कथाकार हैं। ‘अनुभूति’ या ‘ईश्वर का द्वंद्व’ जैसी कुछ कहानियों को छोड़ दें तो अक्सर उनकी कहानियों को पढ़ते हुए डर लगता है।

सूर्यबाला ने कहा कि साहित्य मेरे लिए तीर्थ है और लेखन तीर्थ यात्रा। साहित्य की सार्वभौमिकता पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारतीय विरासत बहुत समृद्ध है। उनके उपन्यास कौन देश को वास में तीन पीढ़ियों का संघर्ष और समरसता है। छोटे शहरों ने भारतीय मूल्यों को सहेज कर रखा है।

सूर्यबाला की रचनाओं का विश्लेषण करते हुए युवा आलोचक डॉ. जनार्दन ने कहा कि सूर्यबाला की कई कहानियों में भरा पूरा परिवार दिखाई पड़ता है। उनकी कुछ कहानियों में कभी-कभी पड़ोसी भी दिख जाते हैं। ‘बाऊजी और बंदर’ और ‘सजायाफ्ता’ में क्षतिग्रस्त संवेदना का रूप दिखाया गया है। संवेदनहीन होने की प्रक्रिया में घर के बच्चे भी शामिल हैं, जो बहुत त्रासद है। उनकी कई कहानियों खासकर ‘सुनंदा चोकरी की डायरी’ से गुजरते हुए भारत और इंडिया का अंतर दिखाई पड़ता है। वैचारिक दृष्टि से सूर्यबाला की कहानियों का पलड़ा गांधी की तरफ़ झुका हुआ है।

कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कवि रजनीश त्रिवेदी (कानपुर), अतिथियों का स्वागत प्रवीण शेखर, धन्यवाद ज्ञापन शिशिर सोमवंशी ने किया। इस मौके पर डॉ. सुप्रिया पाठक, अमितेश कुमार, लक्ष्मण गुप्ता, अनुभा श्रीवास्तव, सुषमा शर्मा, मधु शुक्ला, अनीता त्रिपाठी, प्रेमशंकर, आनंद मालवीय, प्रियदर्शन, मिथिलेश, कुमुद दुबे, श्रीरंजन शुक्ला, संतोष शुक्ला, सुशांत चट्टोपाध्याय, संतोष कुमार मिश्रा, अरशद फाखरी, उमेश चंद्रा, शिवांगी गोयल, नवीन सिन्हा, आलोक सिंह, टोनी सिंह, ब्रजेश यादव, आरती चिराग आदि मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र