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तकनीकी उत्कृष्टता, श्रम सम्मान और नवाचार आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला : भरत राज सिंह

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तकनीकी उत्कृष्टता, श्रम सम्मान और नवाचार आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला : भरत राज सिंह


लखनऊ, 17 सितंबर (हि.स.)। भगवान विश्वकर्मा की परंपरा ज्ञान को कौशल, कौशल को सृजन और सृजन को समाजोपयोगी विकास में बदलने की प्रेरणा देती है। तकनीकी उत्कृष्टता, श्रम का सम्मान और नवाचार ही आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत की आधारशिला हैं। यह बातें गुरुवार को स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (एसएमएस), लखनऊ के महानिदेशक (तकनीकी) प्रो. भरत राज सिंह ने विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कही।

एसएमएस के वर्कशॉप में भगवान विश्वकर्मा की पूजा श्रद्धा और पारंपरिक विधि-विधान से की गई। संस्थान के अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने पूजन कर तकनीकी ज्ञान, कौशल, सृजनशीलता और कार्यस्थल की समृद्धि की कामना की।

मुख्य अतिथि एसएमएस के सचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी शरद सिंह ने कहा कि आधुनिक शिक्षा और तकनीकी विकास में प्रयोगशालाओं, वर्कशॉप, उपकरणों और तकनीकी कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में व्यावहारिक ज्ञान, समस्या समाधान की क्षमता और आत्मनिर्भर तकनीकी दृष्टिकोण विकसित करने में प्रेरणादायी हैं।

कार्यक्रम में निदेशक प्रो. आशीष भटनागर, निदेशक प्रशासन डॉ. जगदीश सिंह, एसोसिएट निदेशक डॉ. धर्मेंद्र सिंह, डीन छात्र कल्याण डॉ. पीके सिंह, डीन इंजीनियरिंग डॉ. मोहम्मद हुसैन, राहुल अवस्थी, विभागाध्यक्षों समेत शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान वर्कशॉप के उपकरणों और कार्यस्थल की स्वच्छता, सुरक्षा व सुव्यवस्थित संचालन पर जोर दिया गया। उपस्थित सदस्यों ने तकनीकी संसाधनों के उचित उपयोग, रखरखाव और निरंतर सुधार का संकल्प लिया। समापन मंगलकामनाओं और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप