खालसा पंथ की स्थापना का प्रतीक है बैसाखी पर्व : रमिंद्र सिंह रिंकू
कानपुर, 14 अप्रैल (हि.स.)। बैसाखी पर्व हमारे लिए आस्था, साहस और परंपरा का प्रतीक है। इसी दिन गुरु साहिब ने खालसा पंथ की स्थापना कर समाज को नई दिशा दी थी। यह पर्व हमें एकता, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। हम आज भी इसे पूरी श्रद्धा और पारंपरिक रीति से मनाते हैं। यह बातें मंगलवार को कार्यक्रम आयोजक रमिंद्र सिंह रिंकू ने कही।
सरसैया घाट स्थित गुरुद्वारा संकट हरण दुख निवारण साहिब में खालसा सृजना दिवस के अवसर पर बैसाखी पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और गुरु साहिब के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
कार्यक्रम का आयोजन गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के तत्वावधान में किया गया, जहां सुबह से ही धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो गई थी। गुरुद्वारे में कीर्तन, अरदास और लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
आयोजकों ने बताया कि बैसाखी का दिन सिख इतिहास में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। तब से यह पर्व आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाता रहा है और आज भी इसकी परंपरा जारी है।
सरसैया घाट स्थित यह गुरुद्वारा कानपुर का एक ऐतिहासिक स्थल माना जाता है, जहां हर वर्ष बैसाखी के अवसर पर मेला आयोजित होता है। इस वर्ष भी यहां विशेष आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु शामिल हुए।
कार्यक्रम में गुरूमुख सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला और सभी ने मिलकर बैसाखी पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

