इलाहाबाद संग्रहालय में दिव्यांगजन बच्चों के लिए ‘अनुभव वीथिका’ का उद्घाटन
--स्पर्श-आधारित प्रदर्शनी से दिव्यांगजन बच्चों के ज्ञानार्जन एवं संवेदी विकास को प्रोत्साहन
--उद्घाटन उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रम, मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी ने किया शुभारम्भ
प्रयागराज, 06 मई (हि.स)। इलाहाबाद संग्रहालय में बुधवार काे राज्यपाल, उत्तर प्रदेश एवं संग्रहालय समिति की अध्यक्षा आनंदीबेन पटेल द्वारा दिव्यांगजन बच्चों के लिए विकसित ‘अनुभव वीथिका’ का ऑनलाइन माध्यम से अनावरण एवं उद्घाटन किया गया। उन्होंने वीथिका का अवलोकन करते हुए बच्चों से संवाद स्थापित किया, उनके अनुभवों को जाना तथा इसे दिव्यांगजन बच्चों एवं संस्थाओं के लिए उपयोगी, आकर्षक एवं संग्रहालय की एक अभिनव उपलब्धि बताया।
दिव्यांगजन बच्चों के लिए वीथिका की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने प्रदर्शित विरासत स्थलों पर आधारित स्पर्शनीय पुस्तिकाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही, भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के संबंध में बच्चों से संवाद कर उनकी जिज्ञासाओं को प्रोत्साहित किया तथा इस पहल के लिए मंडलायुक्त एवं संग्रहालय निदेशक श्रीमती सौम्या अग्रवाल सहित पूरी टीम के प्रयासों की सराहना की।
उद्घाटन अवसर पर दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, उत्तर प्रदेश के सहयोग से 100 विद्यालयी दिव्यांग बच्चों को वीथिका का भ्रमण कराया गया। भ्रमण से पूर्व सभागार में बच्चों हेतु विशेष व्यवस्था के साथ शैक्षिक चलचित्र प्रदर्शित किया गया तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां की गईं। यह भ्रमण कार्यक्रम 6 मई से 20 मई तक निरंतर संचालित किया जाएगा।
‘अनुभव वीथिका’ का विकास नई दिल्ली स्थित स्वयंसेवी संस्था ‘सक्षम’ के सहयोग से किया गया है, जिसमें 11 प्रमुख विरासत स्थलों एवं 10 वन्य जीवों की प्रतिकृतियां स्थापित हैं। उनकी जानकारी ब्रेल लिपि (स्पर्श लेखन प्रणाली) एवं श्रव्य उपकरणों (हेडफोन) के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है, साथ ही स्मारक प्रतिरूप, स्पर्श-आधारित कार्ड एवं अन्य स्पर्श-आधारित खेलों की भी व्यवस्था की गई है।
वीथिका में सांची स्तूप, हम्पी का रथ, स्वर्ण मंदिर, हवा महल, गेटवे ऑफ इंडिया, कुतुब मीनार, राम मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, विवेकानंद रॉक स्मारक तथा ताजमहल सहित विभिन्न धरोहरों को स्पर्श के माध्यम से अनुभव किया जा सकता है। वन्यजीवों में हाथी, बारहसिंगा, मोर, काला चीता, दरियाई घोड़ा एवं जिराफ की प्रतिकृतियाँ प्रदर्शित हैं।
स्पर्श-आधारित प्रदर्शनी दिव्यांगजन बच्चों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है, क्योंकि यह स्पर्श एवं श्रवण के माध्यम से ज्ञानार्जन का प्रभावी अवसर प्रदान करती है। इससे उनकी संवेदी समझ, आत्मविश्वास एवं सहभागिता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
उद्घाटन के उपरांत संग्रहालय सभागार में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका शुभारम्भ मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी ने मंडलायुक्त, जिलाधिकारी एवं अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में जीवन ज्योति संस्थान (वाराणसी), बचपन डे केयर केंद्र (प्रयागराज), भाविनी वेलफेयर सोसायटी (प्रयागराज) तथा माता कलावती विशेष शिक्षा महाविद्यालय (झूंसी) के विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का संयोजन, संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ संजू मिश्रा ने किया।
वीथिका के संयोजन में ‘सक्षम’ संस्था के प्रतिनिधि अरिहंत एवं सहायक संग्रहाध्यक्ष डॉ संजू मिश्रा का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के उपनिदेशक अभय कुमार श्रीवास्तव, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी अशोक कुमार गौतम, समन्वयक चंद्रभान द्विवेदी सहित विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संग्रहालय की ओर से डॉ राजेश मिश्र, सुनील कुमार पाण्डेय, श्वेता सिंह, डॉ वामन वानखेड़े, डॉ सोनिका तिवारी, डॉ ओ.पी. चतुर्वेदी, डॉ सुशील कुमार एवं पुनीत कुमार पाण्डेय का विशेष सहयोग रहा।
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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

