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इतिहास को भुलाया नहीं जाना चाहिए : सुधीर विद्यार्थी

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इतिहास को भुलाया नहीं जाना चाहिए : सुधीर विद्यार्थी


-जन स्मृति से जोड़ता है सुधीर विद्यार्थी का लेखन: प्रो. सत्यकाम

-मुविवि में ‘स्वतंत्रता संग्राम और प्रयागराज’ विषय पर व्याख्यान

प्रयागराज, 28 फरवरी (हि.स)। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के समाज विज्ञान विद्या शाखा के तत्वावधान में शनिवार को लोकमान्य तिलक शास्त्रार्थ सभागार में ‘स्वतंत्रता संग्राम और प्रयागराज’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता प्रख्यात लेखक सुधीर विद्यार्थी ने इतिहास, क्रांतिकारी चेतना और वर्तमान समय की चुनौतियों पर गंभीर विचार व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि मोतीलाल नेहरू, पुरुषोत्तम दास टंडन तथा प्रयागराज क्षेत्र में सक्रिय राष्ट्रीय आंदोलनों होम रूल आंदोलन, खिलाफत आंदोलन और असहयोग आंदोलन की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज त्याग और बलिदान की भावना क्षीण होती दिखाई दे रही है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि इतिहास को भुलाया नहीं जाना चाहिए, बल्कि उसे जीवित रखना समय की आवश्यकता है।

विद्यार्थी ने कहा कि लेखन केवल अतीत का वर्णन न करे, बल्कि भविष्य को दिशा देने वाला होना चाहिए। उन्होंने 1921 से स्वतंत्रता आंदोलन की चर्चा प्रारम्भ करते हुए महान क्रांतिकारी सचिन्द्र नाथ सान्याल के प्रसिद्ध “पीला पर्चा” का उल्लेख किया। जिसमें एक ऐसे समाज की कल्पना की गई थी, जहां मनुष्य द्वारा मनुष्य का शोषण न हो। विद्यार्थी ने ऐतिहासिक काकोरी कांड को स्वतंत्रता संग्राम के निर्णायक क्षणों में से एक बताते हुए हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की भूमिका पर प्रकाश डाला। प्रयागराज स्थित आनंद भवन का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे राष्ट्रीय चेतना का केंद्र बताया।

उन्होंने आचार्य कृपलानी की भाषा शैली, बलुआघाट की ऐतिहासिक सभा में बाल कृष्ण भट्ट के उद्बोधन तथा क्रांतिकारी परम्परा में चन्द्रशेखर आज़ाद और भगत सिंह के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने इतिहासकार पंडित सुंदरलाल की औपनिवेशिक सत्ता पर लिखी रचनाओं का संदर्भ देते हुए कहा कि इतिहास केवल स्मरण नहीं, चेतना का आधार है।

अध्यक्षता करते हुए मुक्त विवि के कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि सुधीर विद्यार्थी का लेखन इतिहास को जन-स्मृति से जोड़ता है, जो आज अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने प्रयागराज के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े इतिहास को विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रस्ताव रखा। साथ ही इतिहास विभाग से अपेक्षा की कि वे सुधीर विद्यार्थी के लेखन पर अकादमिक शोध की दिशा में पहल करें। उन्होंने कहा कि स्थानीय इतिहास को अकादमिक रूप देना नई पीढ़ी को अपनी वैचारिक विरासत से जोड़ने का प्रभावी माध्यम होगा। इसी क्रम में उन्होंने अपनी प्रथम पुस्तक में वर्णित शहीद अशफाक उल्ला खां के योगदान का उल्लेख करते हुए उनके त्याग और वैचारिक दृढ़ता को याद किया।

मुक्त विवि के मीडिया प्रभारी डॉ प्रभात चंद्र मिश्र ने बताया कि कार्यक्रम का संचालन आयोजन सचिव डॉ सुनील कुमार ने किया। अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम निदेशक प्रोफेसर एस कुमार तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर संजय सिंह ने दिया। इस अवसर पर समस्त विश्वविद्यालय के आचार्य, सह-आचार्य, शिक्षकगण, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं, शोधार्थी आदि उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र