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संवाद और ध्यान से ही संभव है विश्व शांति: प्रो. वंदना सिंह

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संवाद और ध्यान से ही संभव है विश्व शांति: प्रो. वंदना सिंह


जौनपुर, 22 जनवरी (हि.स.)। यूपी के जौनपुर स्थित वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना के विशेष शिविर के अंतर्गत रविवार को विश्व शांति हेतु शांति-ध्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं और वैश्विक कल्याण के प्रति जागरूकता विकसित करने का माध्यम भी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि युद्ध कभी भी किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, बल्कि शांति ही मानवता का वास्तविक भविष्य है। उन्होंने समकालीन दार्शनिकों और आध्यात्मिक विचारकों के विचार साझा करते हुए कहा कि शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर की एक अवस्था है। जब तक व्यक्ति का मन शांत नहीं होगा, तब तक विश्व में स्थायी शांति की स्थापना संभव नहीं है। वर्तमान वैश्विक संघर्षों का समाधान संवाद, सहिष्णुता और ध्यान की शक्ति से ही संभव है।

कुलपति ने अंतरराष्ट्रीय तनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे समय में वैश्विक भाईचारे और शांति का संदेश प्रसारित करना अत्यंत आवश्यक है।

विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए संकायाध्यक्ष प्रो. मनोज मिश्र ने कहा कि इस शांति-ध्यान के माध्यम से विश्वविद्यालय ने यह संदेश दिया है कि युवा शक्ति अपनी सकारात्मक ऊर्जा से बड़े से बड़े वैश्विक संघर्षों को भी वैचारिक रूप से प्रभावित कर सकती है।

कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में विश्व जल दिवस के परिप्रेक्ष्य में डॉ. श्याम कन्हैया सिंह, डॉ. अजय विक्रम सिंह एवं प्रो. देवराज सिंह ने संयुक्त रूप से विचार व्यक्त किए। जल प्रबंधन में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाकर ही वास्तविक समानता स्थापित की जा सकती है।

इस दौरान एनएसएस स्वयंसेवकों द्वारा जल संरक्षण विषय पर प्रस्तुति दी गई तथा विश्वविद्यालय परिसर स्थित अमृत सरोवर में स्वच्छता अभियान चलाकर जन-जागरूकता का संदेश दिया गया। स्वागत एवं संचालन डॉ. अनुराग मिश्र ने किया। इस दौरान डॉ. शशिकांत यादव, डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. अजय मौर्य, डॉ. विशाल यादव, डॉ. प्रमेन्द्र विक्रम सिंह सहित स्वयंसेवक दिव्यांशु सिंह, पृथ्वी राज सिंह, मोनू पांडे व बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव