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योगी सरकार में आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं, कानपुर की बेटियों को मिली 'नई राह' : जिलाधिकारी

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योगी सरकार में आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं, कानपुर की बेटियों को मिली 'नई राह' : जिलाधिकारी


- 9 वर्षों में बदला महिलाओं का जीवन, 1.20 लाख को मातृ वंदना का लाभ- 17.85 लाख महिलाओं के खुले बैंक खाते, सुरक्षा और सम्मान के साथ आत्मनिर्भर बनीं बेटियां- 'नई राह' पहल से जीजीआईसी चुन्नीगंज की छात्राओं को मिल रहा मुफ्त भोजन

कानपुर, 22 मार्च (हि.स.)। मिशन शक्ति के तहत हमारा फोकस बेटियों की शिक्षा और उनके स्वास्थ्य पर है। 'नई राह' योजना के माध्यम से हमने छात्राओं को स्कूल में ही पोषण देने की कोशिश की है, ताकि वे बेहतर ढंग से पढ़ाई कर सकें। कानपुर नगर प्रशासन हर पात्र महिला तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह बातें रविवार को जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने कहीं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों के दौरान कानपुर की सूरत पूरी तरह बदल गई है। इस 'नव-निर्माण' के दौर में सबसे अच्छी बात यह रही कि विकास का फायदा सीधे उन महिलाओं और बेटियों तक पहुँचा है, जो अब तक उपेक्षित थीं। आज कानपुर महिला सुरक्षा, पढ़ाई-लिखाई और सरकारी योजनाओं के लाभ में पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन गया है।

बेटियों की पढ़ाई और सेहत की चिंता

योगी सरकार की 'मिशन शक्ति' योजना ने कानपुर के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली बेटियों के लिए खुशियों के नए द्वार खोल दिए हैं। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की देखरेख में सितंबर 2025 से एक अनोखी पहल 'नई राह' शुरू की गई। इसके तहत चुन्नीगंज के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (जी.जी.आई.सी.) में पढ़ने वाली कक्षा नौ से 12 तक की छात्राओं को अब स्कूल में ही रोज मुफ्त में दोपहर का खाना (मिड-डे-मील) दिया जा रहा है।

बता दें कि कानपुर नगर पूरे उत्तर प्रदेश का ऐसा पहला जिला है, जहाँ बड़ी क्लास की छात्राओं को भी यह सुविधा मिल रही है और जी.जी.आई.सी. चुन्नीगंज राज्य का पहला ऐसा स्कूल बन गया है। इस कदम से न सिर्फ गरीब परिवारों की बेटियों को सही पोषण मिल रहा है, बल्कि उनकी पढ़ाई बीच में छूटने का डर भी खत्म हो गया है।

महिलाओं की आर्थिक मजबूती

सरकार ने बिचौलियों का चक्कर खत्म कर दिया है और अब हर योजना का पैसा सीधे महिलाओं के बैंक खातों (डीबीटी) में पहुंच रहा है। 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना' के जरिए जिले की 1,20,389 महिलाओं को करीब 80 करोड़ रुपये की मदद दी गई है, ताकि मां और बच्चे दोनों तंदुरुस्त रहें।

इसी तरह जो महिलाएं बेसहारा थीं, उनके लिए 'निराश्रित महिला पेंशन' किसी वरदान से कम नहीं साबित हुई। पिछले कुछ सालों में इस पेंशन को पाने वाली महिलाओं की संख्या 38 हजार से बढ़कर 73 हजार तक पहुँच गई है। यही नहीं, जनधन खातों की वजह से अब जिले की लगभग 17.85 लाख महिलाओं के पास अपना बैंक खाता है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना में भी बड़ा बदलाव दिखा है, जहां लाभार्थियों की संख्या 4,814 से बढ़कर 15,861 हो गई है और इन घरों का मालिकाना हक ज्यादातर महिलाओं को ही दिया गया है, जिससे उन्हें समाज में एक नई पहचान मिली है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप