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शस्त्रों का उद्देश्य अन्याय मिटाना, शास्त्रों से मिलता है ज्ञान का मार्ग : सतीश महाना

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शस्त्रों का उद्देश्य अन्याय मिटाना, शास्त्रों से मिलता है ज्ञान का मार्ग : सतीश महाना


कानपुर, 20 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय संस्कृति में ज्ञान और शक्ति का संतुलन समाज को सही दिशा देने के साथ ही अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है। शास्त्र मनुष्य को विवेक और सदाचार का रास्ता दिखाते हैं, जबकि शस्त्र अन्याय और अत्याचार से रक्षा करने की शक्ति का प्रतीक हैं।

यह बातें मंगलवार को बिरहाना रोड स्थित खत्री धर्मशाला में आयोजित शस्त्र पूजन कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कही। विजयादशमी के अवसर पर खत्री समाज की ओर से आयोजित कार्यक्रम में सतीश महाना ने शस्त्र पूजन किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में शास्त्रों तथा शस्त्रों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दशहरा केवल उत्सव का पर्व नहीं है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की जीत और अहंकार के अंत का संदेश भी देता है।

महाना ने कहा कि भगवान श्रीराम की विजय हमें धर्म के मार्ग पर चलने और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने की प्रेरणा देती है। रावण अत्यंत ज्ञानी था, लेकिन उसके भीतर का अहंकार उसके पतन का कारण बना। उसकी विद्वता भी उसे विनाश से नहीं बचा सकी। भगवान श्रीराम ने रावण के अहंकार का अंत कर यह संदेश दिया कि ज्ञान के साथ विनम्रता और मर्यादा का होना भी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि शस्त्र पूजन की परंपरा का उद्देश्य शक्ति के महत्व को समझने के साथ उसके जिम्मेदार उपयोग का संकल्प लेना है। शस्त्रों का प्रयोग किसी पर अत्याचार करने के लिए नहीं, बल्कि अन्याय को रोकने और न्याय की रक्षा के लिए होना चाहिए। समाज में साहस के साथ विनम्रता और सेवा की भावना भी बनी रहनी चाहिए।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विजयादशमी का पर्व लोगों को अपने भीतर के अहंकार को त्यागने, सदाचार अपनाने और न्याय के पक्ष में खड़े होने की प्रेरणा देता है। भारतीय परंपरा में शास्त्र और शस्त्र दोनों का महत्व इसी भावना से जुड़ा है। ज्ञान व्यक्ति को सही और गलत का बोध कराता है, वहीं शक्ति उसे सही के पक्ष में खड़े होने का साहस देती है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप