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महाराणा प्रताप का हृदय धड़कता था तो निकलती थी भारत माता की जय की आवाज : डॉ महेंद्र सिंह

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महाराणा प्रताप का हृदय धड़कता था तो निकलती थी भारत माता की जय की आवाज : डॉ महेंद्र सिंह


वाराणसी, 09 मई (हि. स.)। वाराणसी में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन पीठ सभागार में महाराणा प्रताप के जन्मोत्सव पर्व के उपलक्ष्य पर 'विकसित भारत की संकल्पना में महाराणा प्रताप का राष्ट्र प्रेम एवं राष्ट्रीयता' विषयक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि एमएलसी डॉ महेंद्र सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप की जन्म जयंती केवल काशी में नहीं मनाई जा रही, पूरी दुनिया जयंती मनाई जा रही है। महाराणा प्रताप का हृदय धड़कता था तो मेवाड़ से भारत माता की जय की आवाज निकलती थी। 85 किलो की दो तलवार, 81 किलो का भाला लेकर चेतक के साथ महाराणा प्रताप युद्ध लड़ते थे। मुगलों की सेना को चीरते हुए महाराणा प्रताप निकल जाते थे। प्रताप का हाथी प्राण दे दिया था, लेकिन मुगलों की घास नहीं खाई। ऐसे थे, प्रताप के हाथी और घोड़े। यह शौर्य केवल भारत के धरती पर हो सकता है।

इससे पहले सारस्वत अतिथि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत संगठन मंत्री अभिलाष ने कहा कि चलचित्र के माध्यम से सभागार महाराणा प्रताप का जीवन चित्र दिखाया गया। महाराणा प्रताप ने जीवन में लड़ना सीखा, चुनौती का सामना करना सीखा, भागना नहीं सिखा। घास की रोटी खाई, लड़ाई लड़ी। हार नहीं मानी।

विशिष्ट अतिथि विधायक सुशील सिंह ने कहा कि आज शौर्य, वीरता, त्याग के महानायक महाराणा प्रताप को नमन करते है। जब मुगलों का आतंक था, तब महाराणा प्रताप ने घास की रोटी खाकर संघर्ष किया। उन्होंने कहा था, मैं मर जाऊंगा लेकिन मुगलों के सामने झुकूंगा नहीं। महाराणा प्रताप के जीवन को समझ कर उसे अपने जीवन के अंदर लाएं। 17 बार महाराणा प्रताप ने अकबर की सेना को हराया था। अकबर कभी महाराणा प्रताप को हरा नहीं पाया।

विशिष्ट अतिथि विधायक डॉ अवधेश सिंह ने कहा कि अकबर तो चला गया, लेकिन दूसरे अकबर ना पैदा हो इसका ध्यान आज नौजवानों को रखना होगा। महाराणा प्रताप ने संकल्प लिया था, आज नौजवान संकल्प ले कि विरोधी ताकताें को देश में घुसने नहीं देंगे।

महामना मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान और पंडित दीन दयाल उपाध्याय शोध पीठ द्वारा आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के कुलपति प्रो.वांगचुग दर्जे नेगी ने किया। अतिथियों का स्वागत और संचालन पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ नागेंद्र सिंह ने किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / शरद