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केन्द्रीय संस्कृति मन्त्री से मिले कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा, दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण पर चर्चा

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केन्द्रीय संस्कृति मन्त्री से मिले कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा, दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण पर चर्चा


केन्द्रीय मंत्री ने एमओयू की तकनीकी बाधाएँ दस दिनों में दूर करने का दिया आश्वासन

वाराणसी, 16 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित केन्द्रीय संस्कृति मन्त्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के कैंप कार्यालय में उनसे शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान कुलपति प्रो.शर्मा ने राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन (ज्ञान-भारतम्) के अन्तर्गत विश्वविद्यालय में संचालित दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण, सूचीकरण, डिजिटलीकरण एवं संवर्धन से संबंधित कार्यों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर कुलपति ने संस्कृति मंत्रालय एवं विश्वविद्यालय के मध्य संपादित एमओयू से जुड़ी तकनीकी बाधाओं के शीघ्र समाधान का आग्रह भी किया।

यह जानकारी विश्वविद्यालय के जनसम्पर्क कार्यालय ने दी। बताया गया कि बैठक के दौरान केन्द्रीय संस्कृति मन्त्री ने विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक पांडुलिपि-सम्पदा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए आश्वस्त किया कि एमओयू से सम्बन्धित सभी तकनीकी बाधाओं का समाधान आगामी दस दिनों के भीतर सुनिश्चित कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन के अन्तर्गत संचालित संरक्षण परियोजना को निर्बाध रूप से आगे बढ़ाने तथा भविष्य में भी विश्वविद्यालय को संस्कृति मंत्रालय का पूर्ण सहयोग मिलता रहेगा।

उल्लेखनीय है कि एमओयू से सम्बन्धित तकनीकी कारणों के चलते पिछले लगभग चार माह से परियोजना से जुड़े कर्मियों का मानदेय लम्बित था। केन्द्रीय संस्कृति मंन्त्री के सकारात्मक आश्वासन से इस समस्या के शीघ्र समाधान का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिससे परियोजना की गति पुनः तीव्र होने की अपेक्षा है। वर्ष 2023 में संस्कृति मंत्रालय के राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन (ज्ञान-भारतम्) के साथ सम्पादित तीन वर्षीय एमओयू के अन्तर्गत सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के सरस्वती भवन पुस्तकालय में सुरक्षित लगभग सवा लाख से अधिक दुर्लभ पाण्डुलिपियों के संरक्षण, सूचीकरण, डिजिटलीकरण एवं वैज्ञानिक संवर्धन का महत्त्वपूर्ण कार्य संचालित किया जा रहा है। यह परियोजना भारतीय ज्ञान-परम्परा के संरक्षण की दिशा में देश की प्रमुख पहलों में से एक है।

बताते चले विश्वविद्यालय का सरस्वती भवन पुस्तकालय भारतीय सांस्कृतिक एवं ज्ञान-विरासत का अनुपम भण्डार है। यहाँ संवत् 1181 की कागज़ पर लिखित श्रीमद्भागवत की प्राचीन पाण्डुलिपि, स्वर्णाक्षरों में लिखित भगवद्गीता, वस्त्र पर अंकित दुर्गासप्तशती, चित्रांकित रासपञ्चाध्यायी, भोजपत्र, ताम्रपत्र तथा लाख, काष्ठ एवं वस्त्र पर लिखित अनेक दुर्लभ पाण्डुलिपियाँ सुरक्षित हैं। ये अमूल्य धरोहरें देवनागरी, शारदा, खरोष्ठी, मैथिली, उड़िया, गुरुमुखी, तेलुगु, कन्नड़ सहित अनेक भारतीय लिपियों में उपलब्ध हैं तथा भारतीय ज्ञान-विज्ञान, दर्शन, साहित्य और संस्कृति की अनमोल निधि का प्रतिनिधित्व करती हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी