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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति पदम् विभूषण डॉ आदित्यनाथ झा की मनाई गई जयंती

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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति पदम् विभूषण डॉ आदित्यनाथ झा की मनाई गई जयंती


—प्रतिभा, प्रशासन और भारतीय ज्ञान-परम्परा के अप्रतिम शिल्पी थे डॉ झा: प्रो. रजनीश कुमार

वाराणसी, 18 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मैथिल समाज, उत्तर प्रदेश और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति पद्मविभूषण डा. आदित्यनाथ झा की 115 वीं जयंती मनाई गई। जयंती समारोह में कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार ने कहा कि डॉ. आदित्यनाथ झा जैसे महान व्यक्तित्व का स्मरण करते हुए मन श्रद्धा और गौरव से भर उठता है। उनका जीवन केवल उपलब्धियों की गाथा नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, कर्तव्यनिष्ठा और भारतीय परम्परा के प्रति समर्पण का प्रेरक संदेश है। उन्होंने अपने ज्ञान और दूरदृष्टि से इस संस्था को नई दिशा दी और संस्कृत को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया। ऐसे महापुरुषों का स्मरण हमारे लिए अतीत को दोहराना नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को आत्मसात कर भविष्य का मार्ग प्रशस्त करना है।

समारोह में तुलनात्मक धर्म दर्शन विभाग के विभागाध्यक्ष,दर्शन संकाय प्रमुख प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा कि प्रथम कुलपति प्रतिभा, परम्परा और दूरदृष्टि के अद्वितीय संगम थे। वे महान संस्कृत विद्वान सर गंगानाथ झा के सुपुत्र, प्राचार्य, आई.सी.एस. अधिकारी, मुख्य सचिव, दिल्ली के प्रथम उपराज्यपाल तथा भारतीय प्रशासनिक अकादमी, देहरादून के प्रथम निदेशक रहे। और मुख्य सचिव पद पर रहते हुए सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति का दायित्व भी निभाया। इस संस्था के प्रथम कुलपति के रूप में उन्होंने इसे व्यापक दृष्टि प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्कृत के पंडितों को आधुनिक ज्ञान से जोड़ने के लिए अंग्रेजी विषय को भी महत्व दिया तथा भारतीय ज्ञान-परम्परा को समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाने का प्रयास किया। पिता से कुलपति का दायित्व ग्रहण करना उनके लिए केवल पदभार नहीं, बल्कि पितृऋण चुकाने जैसा भाव था। उनके बहुआयामी लेखन, विद्वत्ता, प्रशासनिक कुशलता और दूरदृष्टि ने विश्वविद्यालय की नींव को सुदृढ़ किया। 18 जनवरी 1972 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनका व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी विश्वविद्यालय के लिए गौरव और प्रेरणा का स्रोत है।

प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी ने कहा कि विश्वविद्यालय की समृद्ध परम्परा को अपने ज्ञान, व्यक्तित्व और कर्तृत्व से गौरवान्वित करने वाले आचार्यों का स्मरण आवश्यक है। विशेषकर आदित्यनाथ झा जैसे विशिष्ट कुलपतियों की जन्म-जयंती मनाकर हम उनके योगदान और प्रेरणादायी व्यक्तित्व को नई पीढ़ी तक पहुँचा सकते हैं। प्रो. सुधाकर मिश्र ने कहा कि आदित्यनाथ झा जैसे विद्वान, दूरदर्शी और अनुकरणीय व्यक्तित्व का स्मरण विश्वविद्यालय की गौरवशाली परम्परा और भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। छात्रकल्याण संकायाध्यक्ष प्रो शैलेश कुमार मिश्र ने कहा कि इस संस्था के निर्माण और विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी विश्वविद्यालय के लिए प्रेरणास्रोत है। समारोह का संयोजन ,संचालन एवं विषय उपस्थापन डॉ कमलेश कुमार झा तथा धन्यवाद ज्ञापन गौतम कुमार झा (एडवोकेट) ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी