इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विजुअल्स के साथ खबर के शब्दाें का तालमेल जरूरी : श्वेता अरोड़ा
कानपुर, 06 मार्च (हि.स.)। टीवी पत्रकारिता की लेखन शैली प्रिंट मीडिया से पूरी तरह अलग होती है। टेलीविजन में खबर लिखते समय शब्दों से अधिक विजुअल्स का महत्व होता है और वही लिखा जाता है जो दर्शक स्क्रीन पर देख रहे होते हैं। एक अच्छा टीवी पत्रकार बनने के लिए भाषा पर पकड़ के साथ पढ़ने और समझने की आदत भी बेहद जरूरी है, क्योंकि मजबूत अध्ययन ही प्रभावी लेखन की आधारशिला बनता है। यह बातें शुक्रवार को वरिष्ठ पत्रकार श्वेता अरोड़ा ने कही।
वह छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में आयोजित दो दिवसीय ‘इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कार्यशाला’ के दौरान छात्र-छात्राओं को संबोधित कर रही थीं। कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की कार्यप्रणाली, टीवी पत्रकारिता की तकनीकी बारीकियों और न्यूज़रूम की वास्तविक कार्यशैली से परिचित कराना था।
कार्यशाला के पहले दिन दो सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में श्वेता अरोड़ा ने टीवी मीडिया राइटिंग के तकनीकी पक्षों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि टेलीविजन समाचार लेखन में विजुअल्स, वॉइस ओवर, बाइट्स, पीटीसी और एंकर लिंक का संतुलन बेहद महत्वपूर्ण होता है। एक आदर्श न्यूज पैकेज इन्हीं तत्वों के समन्वय से तैयार होता है, जिससे दर्शकों तक खबर प्रभावी ढंग से पहुंचती है।
उन्होंने छात्रों को एवी (ऑडियो विजुअल) और एवीबी (ऑडियो विजुअल बाइट) फॉर्मेट के बारे में भी जानकारी दी और बताया कि समाचार बुलेटिन में समय की कमी होने पर कम शब्दों में प्रभावी खबर कैसे लिखी जाती है। इसके साथ ही उन्होंने एएनआई और पीटीआई जैसी समाचार एजेंसियों से आने वाली खबरों के सटीक हिंदी अनुवाद पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि अनुवाद करते समय केवल शब्दों का नहीं बल्कि भाव और तथ्य का भी ध्यान रखना जरूरी होता है, ताकि खबर का मूल अर्थ और विश्वसनीयता बनी रहे।
दूसरे सत्र में उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के तकनीकी पहलुओं जैसे प्री-प्रोडक्शन, प्रोडक्शन और पोस्ट-प्रोडक्शन की प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया। साथ ही ग्राफिक्स, विजुअल्स, स्लग और टिकर जैसे तत्वों की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने कहा कि आज के डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक युग में पत्रकारों के लिए बहुआयामी होना आवश्यक है। कार्यशाला के समन्वयक डॉ. ओम शंकर गुप्ता ने बताया कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों को क्लासरूम की पढ़ाई से आगे बढ़कर न्यूज़रूम की वास्तविक कार्यप्रणाली समझने का अवसर प्रदान करते हैं। इस दौरान डॉ. रश्मि गौतम और डॉ. हरिओम कुमार भी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

