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यूपी कैबिनेट : युवाओं को 25 लाख टैबलेट, बुजुर्गों की उपेक्षा पर संपत्ति से बेदखली का अधिकार

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यूपी कैबिनेट : युवाओं को 25 लाख टैबलेट, बुजुर्गों की उपेक्षा पर संपत्ति से बेदखली का अधिकार


योगी कैबिनेट के दो बड़े फैसले, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा और वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की मजबूत होगी सुरक्षा

लखनऊ, 25 अगस्त (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने और वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा से जुड़े दो महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। सरकार ने स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत 25 लाख टैबलेट खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी, वहीं वृद्ध माता-पिता की उपेक्षा या दुर्व्यवहार करने वाली संतान एवं आश्रित रिश्तेदारों के खिलाफ संपत्ति से बेदखली की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए नियमों में संशोधन किया।

25 लाख टैबलेट से युवाओं को मिलेगा डिजिटल सहारा

योगी कैबिनेट ने स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत 25 लाख टैबलेट की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। टेंडर प्रक्रिया में चयनित संस्थाओं को क्रय आदेश जारी किए जाएंगे और पात्र युवाओं को ये टैबलेट निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और स्वरोजगार के लिए डिजिटल संसाधनों से जोड़ना है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 2,374.60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। योजना के तहत स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा और आईटीआई समेत विभिन्न शिक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अध्ययनरत पात्र युवाओं को लाभ मिलेगा।

वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने पत्रकारों को बताया कि टैबलेट मिलने से युवाओं को ऑनलाइन अध्ययन, प्रशिक्षण, सरकारी एवं गैर-सरकारी योजनाओं तथा रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ी सेवाओं तक आसान पहुंच मिलेगी। इससे युवाओं की तकनीकी क्षमता और रोजगारपरक दक्षता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

बुजुर्गों की उपेक्षा पर संपत्ति से बेदखली का अधिकार

उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने ‘उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियमावली-2014’ में संशोधन को भी मंजूरी दी है। इसके तहत नियम 22 में 22क, 22ख और 22ग जोड़े जाएंगे। नए प्रावधानों के अनुसार यदि संतान या अन्य आश्रित रिश्तेदार किसी वरिष्ठ नागरिक का भरण-पोषण नहीं करते अथवा उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं तो बुजुर्ग उन्हें अपनी संपत्ति से बेदखल करने की कार्रवाई कर सकेंगे।

बेदखली की प्रक्रिया को स्पष्ट और समयबद्ध बनाया गया है। ऐसे मामलों में जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत की जा सकेगी और शिकायतों की सुनवाई 30 दिन के भीतर किए जाने का प्रावधान होगा। जिला मजिस्ट्रेट को ऐसे मामलों की मासिक रिपोर्ट सरकार को भी देनी होगी।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि सरकार जल्द ही वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए टोलफ्री नंबर भी जारी करेगी, ताकि ऐसे बुजुर्ग जो स्वयं शिकायत दर्ज कराने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें आवश्यक मदद उपलब्ध कराई जा सके। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य वृद्ध माता-पिता को सम्मानजनक जीवन दिलाना, उनके अधिकारों की रक्षा करना और उनके साथ होने वाले दुर्व्यवहार पर प्रभावी रोक लगाना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा