home page

उप्र में बारिश-बाढ़ से 25 जिलों में हालात गंभीर, बीते 48 घंटों में बरेली में हुई सर्वाधिक बारिश

 | 
उप्र में बारिश-बाढ़ से 25 जिलों में हालात गंभीर, बीते 48 घंटों में बरेली में हुई सर्वाधिक बारिश


लखनऊ, 08 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश और बांधों से छोड़े जा रहे पानी के कारण प्रदेश के करीब 25 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। इस बीच पिछले 24 से 48 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में तेज से मध्यम बारिश दर्ज की गई है। बरेली, एटा, शाहजहांपुर, बहराइच और लखीमपुर खीरी देश में सर्वाधिक बारिश वाले पांच जिलों में शामिल रहे हैं।

भारी बारिश के चलते कई जिलों के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति है। बहराइच में घाघरा नदी के उफान और बैराजों से छोड़े गए पानी के कारण कई गांव प्रभावित हुए हैं, जबकि बरेली में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है।

हालात को देखते हुए है जिला प्रशासन ने बरेली में मंगलवार 08 सितंबर से 09 सितंबर तक सभी स्कूल बंद रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं सरकारी अधिकारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं, ताकि राहत और बचाव कार्यों में प्रशासन पूरी तरह सक्रिय रहे।

लखनऊ मौसम केंद्र के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, मानसून की गतिविधियों में कुछ कमी आने के बावजूद अगले दो दिनों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। नेपाल से सटे जिलों और प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग ने बहराइच, बलरामपुर, बिजनौर, लखीमपुर खीरी, महाराजगंज, मुरादाबाद, सिद्धार्थनगर और श्रावस्ती समेत कई जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। वहीं बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और आसपास के क्षेत्रों में भी बारिश को लेकर सतर्कता बरती जा रही है।

प्रशासन ने बाढ़ और जलभराव वाले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। लोगों से नदी, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

प्रदेश में घाघरा, शारदा, सरयू, पांडु, सई नदियों में उफान, लोग प्रभावित

राजधानी लखनऊ के ग्रामीण क्षेत्रों में भी नदियों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। रहीमाबाद इलाके में बेहता नदी और निगोहां-बंथरा क्षेत्र में सई नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी से चिंता बढ़ी है। बीकेटी क्षेत्र में गोमती नदी का पानी भी बढ़ा है।

बहराइच में घाघरा नदी खतरे के निशान से करीब 42 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। नदी के बढ़े जलस्तर से जिले के लगभग 15 गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं।

लखीमपुर खीरी में शारदा नदी का पानी भी खतरे के निशान के पार पहुंच गया है। पलिया में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 28 सेंटीमीटर अधिक दर्ज किया गया। बनबसा बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद कई ग्रामीण संपर्क मार्गों पर पानी भर गया है।

अयोध्या में सरयू नदी खतरे के निशान से करीब 31 सेंटीमीटर ऊपर है। मऊ में भी सरयू का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। पिछले 24 घंटे में करीब 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई और नदी खतरे के निशान से लगभग 55 सेंटीमीटर ऊपर बताई गई है।

सीतापुर में बैराजों से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद बाढ़ का दबाव बढ़ा है। रेउसा, रामपुर मथुरा और बेहटा क्षेत्र के करीब 274 गांव प्रभावित हैं। वहीं फर्रुखाबाद में गंगा की बाढ़ से लगभग 102 गांवों और करीब 80 हजार लोगों के प्रभावित होने की सूचना है।

बलिया में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 2.05 मीटर ऊपर बना हुआ है। हालांकि यहां पानी धीरे-धीरे कम होने के संकेत हैं। गाजीपुर में भी गंगा के जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है।

कानपुर नगर और कानपुर देहात में पांडु नदी के बढ़े जलस्तर ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बाढ़ से करीब 40 हजार लोगों के प्रभावित होने और एक हजार से अधिक घरों में पानी पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

चित्रकूट में मंदाकिनी का जलस्तर घटा, राहत कार्य जारी

चित्रकूट में सितंबर की शुरुआत में आई बाढ़ के बाद मंदाकिनी नदी में भीषण उफान आ गया था। नदी में आए उफान के चलते मंदाकिनी का जलस्तर अधिकतम करीब 135.20 मीटर तक पहुंचा गया था और रामघाट समेत आसपास के निचले इलाकों में पानी भर गया था। अब यहां लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इस दौरान बाढ़ से 36 गांव प्रभावित हुए थे, जबकि रामघाट और आसपास मकान, दुकानें व धार्मिक स्थल भी काफी असर पड़ा है। पानी उतरने के बाद अब प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाने, सफाई और राहत-पुनर्वास का काम तेजी से चल रहा है। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ में यहां पहुंचे थे और प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान की थी। फिलहाल प्रशासन नदी और प्रभावित इलाकों पर लगातार नजर बनाए हुए है।

दूसरी ओर वाराणसी और प्रयागराज में भी गंगा के जलस्तर में अब धीरे-धीरे कमी आने लगी है। गाजीपुर में भी नदी का पानी उतर रहा है। इसके बावजूद प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और प्रशासन की ओर से निगरानी जारी है।

हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा