शिक्षा से सांसारिक जीवन की उन्नति लेकिन दीक्षा से सुधरता है परलोक: देवकीनंदन महाराज
-गुरु के प्रति आभार प्रदर्शित करने का पर्व है गुरु पूर्णिमा: देवकीनंदन महाराज
-गुरु पूर्णिमा महोत्सव में नए शिष्यों ने ली दीक्षा, नशामुक्त जीवन का लिया संकल्प
मथुरा, 28 जुलाई(हि.स.) गुरु पूर्णिमा का पर्व हमें अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता प्रदर्शित करने का अवसर देता है। गुरु हमारी आध्यात्मिक चेतना को जागृत कर ईश्वर से जोड़ने का कार्य करते हैं। अध्यात्म इस लोक से परलोक तक की यात्रा का माध्यम है।
उक्त विचार मंगलवार दोपहर वृंदावन में देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज ने गुरु पूर्णिमा महोत्सव में व्यक्त किए। मंगलवार को छटीकरा मार्ग स्थित प्रियाकांत जू मंदिर पर गुरुपूर्णिमा महोत्सव का प्रारंभ हो गया। प्रथम दिवस पर देवकीनंदन महाराज ने शिष्यों को आशीर्वचन देते हुए गुरु दीक्षा और गुरुपूर्णिमा पर्व का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा हमारे सांसारिक जीवन को उन्नत करती है और दीक्षा आध्यात्मिक जीवन की राह पर आगे बढ़ने की प्रक्रिया है। समर्थ गुरु से दीक्षा प्राप्त कर प्राणी अपनी आध्यात्मिक यात्रा से परलोक को सुधारता है। कहा कि गुरु के वचनों में बंधकर शिष्य अपने सांसारिक जीवन के संशयों से मुक्त हो जाता है।
इससे पूर्व शांति सेवा सभागृह में प्रातः बड़ी संख्या में देश विदेश से आए श्रद्धालुओं ने देवकीनंदन महाराज से दीक्षा प्राप्त कर, नशा और सभी व्यसन छोड़कर सात्विक जीवन जीने का संकल्प लिया। इसके पश्चात भोजन प्रसादी ग्रहण की। विश्व शांति सेवा चेरिटेबल सचिव विजय शर्मा ने बताया कि बुधवार को हजारों शिष्यगण गुरु चरण पूजन कर गुरु पूर्णिमा पर्व मनाएंगे ।
हिन्दुस्थान समाचार / महेश कुमार

