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वाराणसी: पहली बार बड़ी शीतलाधाम से जाएगा बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव चढ़ावा

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वाराणसी: पहली बार बड़ी शीतलाधाम से जाएगा बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव चढ़ावा


—बसंत पंचमी पर काशी की लोक परंपरा के अनुसार चढ़ेगा बाबा का तिलक, रंगभरी एकादशी तक चलेगा मांगलिक अनुष्ठानों का क्रम

वाराणसी,21 जनवरी (हि.स.)। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी (वाराणसी) में बसंत पंचमी पर्व पर बाबा श्री काशी विश्वनाथ के तिलकोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। सदियों पुरानी लोक परंपरा के अनुसार हर वर्ष बसंत पंचमी पर काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत के टेढ़ीनीम स्थित आवास पर बाबा विश्वनाथ की पंचबदन चल प्रतिमा का विधि-विधानपूर्वक तिलकोत्सव किया जाता है। यह तिलकोत्सव काशीवासियों की ओर से लोकाचार के रूप में संपन्न होता है, जिसमें सम्पूर्ण काशी बाबा के सगुन में सहभागी बनती है। इस वर्ष बसंत पंचमी (शुक्रवार) को पहली बार दशाश्वमेध स्थित सिद्धपीठ बड़ी शीतला माता मंदिर के महंत परिवार की ओर से काशीपुराधीश्वर बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव संपन्न कराया जाएगा। इसके साथ ही काशी की उन लोक परंपराओं का शुभारंभ हो जाएगा, जो बाबा के विवाह उत्सव से जुड़ी मानी जाती हैं और जो रंगभरी एकादशी पर माता गौरा (पार्वती) के गौना तक निरंतर चलती रहती हैं। महंत आवास पर होने वाले इस आयोजन से संबंधित शिवांजलि के संयोजक संजीव रत्न मिश्र ने बताया कि काशी में बसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं है, बल्कि यह बाबा विश्वनाथ के सगुन और मांगलिक अनुष्ठानों की शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। लोक मान्यता के अनुसार बसंत पंचमी से बाबा के विवाह से जुड़े उत्सवों की श्रृंखला प्रारंभ होती है। इसी क्रम में तिलकोत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसमें काशीवासी बाबा को दूल्हे के रूप में तिलक अर्पित करते हैं। टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर संपन्न होने वाला यह तिलकोत्सव काशी की विशिष्ट परंपरा है, जिसमें बाबा विश्वनाथ की पंचबदन चल प्रतिमा को विशेष रूप से सुसज्जित कर वैदिक विधि-विधान के साथ तिलक किया जाता है। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि काशी की सांस्कृतिक विरासत और लोक आस्था का जीवंत उदाहरण भी है।

—बड़ी शीतला माता मंदिर निभाएगा इस वर्ष तिलकोत्सव की जिम्मेदारी

सिद्धपीठ बड़ी शीतला माता मंदिर के उप महंत अवशेष पाण्डेय (कल्लू महाराज) ने बताया कि काशी की लोकपरंपरा के अनुसार प्रत्येक वर्ष किसी न किसी काशीवासी परिवार द्वारा बाबा विश्वनाथ के तिलकोत्सव का दायित्व निभाया जाता है। इसी क्रम में इस वर्ष यह सौभाग्य बड़ी शीतला माता मंदिर के महंत परिवार को प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को तिलकोत्सव से संबंधित सभी सामग्री बड़ी शीतला माता मंदिर से बांसफाटक स्थित धर्म निवास परिसर में अवस्थित श्रीयंत्र पीठम लाई जाएगी। यहीं से शुक्रवार को सायंकाल शुभ समय पर तिलकोत्सव का पारंपरिक आयोजन आरंभ होगा।

उपमहंत अवशेष पाण्डेय ने बताया कि शुक्रवार को सायंकाल निर्धारित समयानुसार श्रीयंत्र पीठम से बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव लेकर टेढ़ीनीम स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास के लिए बड़ी शीतला माता मंदिर के श्री महंत शिवप्रसाद पाण्डेय ‘लिंगिया महाराज’ के नेतृत्व में पहुंचेगा। वैदिक मंत्रोच्चार, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और भक्तिमय वातावरण के बीच बाबा के तिलक की सामग्री महंत आवास तक पहुंचाई जाएगी।

—11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा होगा विशेष पूजन

शिवांजलि के संयोजक संजीव रत्न मिश्र ने बताया कि बसंत पंचमी के अवसर पर सायंकाल तिलकोत्सव से पूर्व टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि परिवार की वरिष्ठ सदस्य मोहिनी देवी के सानिध्य में अंकशास्त्री महंत वाचस्पति तिवारी द्वारा 11 वैदिक ब्राह्मणों के साथ बाबा विश्वनाथ की पंचबदन प्रतिमा का विशेष पूजन किया जाएगा। पूजन के उपरांत बाबा का परंपरागत एवं भव्य श्रृंगार किया जाएगा।

—सप्तर्षि आरती से पूर्व होगा तिलकोत्सव

सायंकाल शुभ लग्न के अनुसार विश्वनाथ मंदिर में होने वाली सप्तर्षि आरती से पहले बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव किया जाएगा। वैदिक विधि-विधान के साथ काशीवासी बाबा को तिलक अर्पित करेंगे और उनके विवाह से जुड़े सगुन की शुरुआत करेंगे। लोक मान्यता है कि बसंत पंचमी से लेकर रंगभरी एकादशी तक बाबा विश्वनाथ विवाहोत्सव के भाव में रहते हैं। रंगभरी एकादशी के दिन बाबा माता गौरा को गौना लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर आते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी