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वैश्विक बाजार की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार करें वस्त्र उद्योग : वृंदा मनोहर देसाई

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वैश्विक बाजार की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार करें वस्त्र उद्योग : वृंदा मनोहर देसाई


बनारस और पूर्वांचल के वस्त्र उद्योग को मिलेगा वैश्विक मंच, जागरूकता कार्यक्रम में भारत-ईयू एफटीए और निर्यात प्रोत्साहन पर चर्चा

वाराणसी, 02 सितंबर (हि.स.)। वस्त्र मंत्रालय की टेक्सटाइल कमिश्नर वृंदा मनोहर देसाई ने बनारस और पूर्वांचल के वस्त्र उद्योग को वैश्विक मंच उपलब्ध कराने के लिए प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाने पर जोर दिया है। उन्होंने स्थानीय वस्त्र निर्माताओं, निर्यातकों और एमएसएमई हितधारकों से वैश्विक बाजार की बदलती जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार करने तथा केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की।

बुधवार को वाराणसी के एक होटल में वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन वस्त्र समिति द्वारा संचालित टेक्सटाइल एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर (टीईईएफसी), वाराणसी की ओर से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए टेक्सटाइल कमिश्नर ने कहा कि भारतीय वस्त्र उद्योग में वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं। इसके लिए उत्पादों की गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धात्मकता और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पादन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

वस्त्र समिति के सचिव कार्तिकेय ढांडा ने टेक्सटाइल एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे सुविधा केंद्र निर्यातकों को बाजार से जुड़ी आवश्यक जानकारी और हर स्तर पर मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहचान दिलाने के साथ निर्यात को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘बिल्डिंग ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस: इंडिया-ईयू के बीच होने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन फॉर टेक्सटाइल सेक्टर’ रहा। इसका उद्देश्य वाराणसी और पूर्वांचल के वस्त्र निर्माताओं एवं निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार, विशेष रूप से यूरोपीय संघ (ईयू) के बाजारों में उपलब्ध अवसरों से परिचित कराना था।

वस्त्र समिति के सहायक निदेशक अम्बरीश सिंह ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत स्थानीय वस्त्र उद्योग के लिए संभावित अवसरों, टैरिफ रियायतों, रूल्स ऑफ ओरिजिन और आवश्यक दस्तावेजीकरण की जानकारी दी। उन्होंने निर्यातकों को एफटीए के प्रावधानों का लाभ उठाने के लिए जरूरी प्रक्रियाओं और अनुपालनों के बारे में विस्तार से बताया।

एक्जिम बैंक, लखनऊ के रीजनल हेड आशीष सोनी ने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (ईपीएम) की जानकारी देते हुए निर्यातकों और एमएसएमई के लिए उपलब्ध वित्तीय एवं रणनीतिक सहायता पर प्रकाश डाला। वहीं, डीजीएफटी की ओर से निर्यात प्रक्रिया और उससे संबंधित दिशा-निर्देशों पर विशेष प्रस्तुति दी गई।

कार्यक्रम में संयुक्त डीजीएफटी-वाराणसी आलोक द्विवेदी, कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के वाइस चेयरमैन असलम महबूब तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश निर्यातक संघ के कोषाध्यक्ष राजेश कुशवाहा समेत वस्त्र क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रश्नोत्तर एवं संवाद सत्र आयोजित किया गया। इसमें वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों से आए वस्त्र निर्माताओं, निर्यातकों और एमएसएमई प्रतिनिधियों ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते, एचएस वर्गीकरण, निर्यात प्रक्रिया और नियामकीय अनुपालनों से जुड़े सवाल विशेषज्ञों के समक्ष रखे। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए वैश्विक बाजार में निर्यात बढ़ाने के लिए जरूरी कदमों की जानकारी दी।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी