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ज्येष्ठ अधिकमास के सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी, किया दान पुण्य

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ज्येष्ठ अधिकमास के सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी, किया दान पुण्य


ज्येष्ठ अधिकमास के सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी, किया दान पुण्य


—गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में लगाई हाजिरी, पितरों की आत्मा की शांति के लिए किया श्राद्ध

वाराणसी, 15 जून (हि.स.)। ज्येष्ठ अधिकमास के सोमवती अमावस्या पर सोमवार को उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाई और घाटों पर दानपुण्य किया। गंगा स्नान के बाद हजारों श्रद्धालुओं ने गंगातट पर अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए विधि विधान से श्राद्ध और तर्पण भी किया। लगभग 30 वर्षों बाद सोमवती अमावस्या के दुर्लभ संयोग में लोगों ने पात्र में जल लेकर काले तिल, थोड़ा सा दूध, कुशा और फूल मिला कर पूर्वजों का ध्यान कर उन्हें जलांजलि दी और घर परिवार में सुख शांति के लिए पूर्वजों से प्रार्थना की।

इसके पहले मलमास के सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान के लिए श्रद्धालु भोर से ही गंगा तट पर पहुंचने लगे। सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान के लिए दशाश्वमेधघाट, प्राचीन शीतलाघाट, अहिल्याबाईघाट, पंचगंगाघाट, गायघाट, भैसासुरघाट, अस्सी व भदैनी के अलावा सामनेघाट पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। अहिल्याबाई घाट के कर्मकांडी संतोष तिवारी ने बताया कि सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। यह दिन पितरों की कृपा प्राप्ति के लिए शुभ माना जाता है। सोमवती अमावस्या के शुभ मुहूर्त और पितरों को प्रसन्न करने के लिए लोगों ने पवित्र गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और दानपुण्य कर हजारों लोगों ने अपने पितरों का तर्पण भी किया। उन्होंने बताया कि इस बार 30 वर्षों बाद सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग बना। इसमें गंगास्नान, महादेव का जलाभिषेक, और पितरों के लिए तर्पण का विशेष फल मिलता है। मलमास में धार्मिक कार्यों का महत्व बढ़ जाता है। संतोष तिवारी के अनुसार अधिकमास स्वयं भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी