शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मिले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, लिया आशीर्वाद
—गविष्टी यात्रा के 12वें दिन पिंडरा में वैदिक मंत्र अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ का सामूहिक उच्चारण, शंकराचार्य ने गौ रक्षा का संकल्प दिलाया
वाराणसी, 14 मई (हि.स.)। गविष्टी (गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा के 12वें दिन गुरूवार को ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पिण्डरा विधानसभा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित किया। शंकराचार्य ने लोगों को गौ रक्षा का संकल्प भी दिलाया। सभा में वैदिक मंत्र अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ का सामूहिक उच्चारण भी किया गया। जनसभा में पहुंच कर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की और उनसे आशीर्वाद भी लिया।
जनसभा में शंकराचार्य ने कहा कि गाय केवल दूध देने की मशीन नहीं, जन्म-जन्म की माता है। वैतरणी के उस पार भी गौ माता ही साथ जाती है। उन्होंने लोगों को धेनु और कामधेनु का अंतर भी समझाया। उन्होंने कहा कि गाय हमारी प्रथम पोषक है। हमारे रक्त में जो श्वेत कण हैं, वे गौ माता के दूध का अंश हैं। जो जन्म देने वाली माँ बदलती रहती है, वह गौ माता हर जन्म में हमारी माता रही है। इसीलिए गौ माता का महात्म्य जन्म देने वाली माता से भी अधिक है।
उन्होंने धेनु और कामधेनु का अंतर समझाते हुए कहा कि जब सामान्य सेवा की जाए तो गाय धेनु बनती है। अर्थात् दबाने पर दूध देती है। जब विशेष प्रेम और सेवा की जाए तो वही गाय कामधेनु बन जाती है,बिना माँगे ही जो चाहो देने में सक्षम। उन्होंने कहा कि आज का हिंदू समाज गाय से केवल दूध की अपेक्षा रखता है, आशीर्वाद की नहीं। और यही भूल सनातन धर्म की सबसे बड़ी क्षति का कारण बन रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

