संत रविदास की 650वीं जयंती पर दुल्हन की तरह सजी काशी
—लंका से चौक और लहुराबीर से मलदहिया तक चौराहों की सजावट,सीर गोवर्धनपुर में आठ स्वागत द्वार
वाराणसी,28 जुलाई (हि.स.)। संत शिरोमणि गुरु रविदास की 650वीं जयंती वर्ष को भव्य और यादगार बनाने के लिए धर्म नगरी काशी को दुल्हन की तरह सजाया गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)की ओर से मंगलवार को शहर के प्रमुख चौराहों पर विशेष सजावट, स्वागत द्वारों का निर्माण, होर्डिंग्स तथा झालर लगाए गए है। जयंती समारोह को लेकर काशी के प्रमुख मार्गों और संत रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर क्षेत्र को विशेष रूप से सजाया गया है।
भाजपा के काशी क्षेत्र मीडिया प्रभारी नवरतन राठी ने मंगलवार काे बताया कि वाराणसी शहर के 20 प्रमुख चौराहों और तिराहों को सजाया गया है । इनमें मालवीय प्रतिमा लंका गेट, गुरुधाम चौराहा, भेलूपुर चौराहा, सोनारपुरा चौराहा, गौदौलिया चौराहा, मैदागिन व चौक, कबीर मठ चौराहा, लहुराबीर चौराहा, सरदार पटेल प्रतिमा मलदहिया, साजन तिराहा, सिगरा चौराहा, संत अतुलानंद, राजर्षि प्रतिमा गिलट बाजार, भोजूबीर तिराहा, सर्किट हाउस, कचहरी गोलघर चौराहा, अंबेडकर चौराहा, पुलिस लाइन तिराहा, चौकाघाट चौराहा और तेलियाबाग तिराहा शामिल हैं। इन स्थानों पर सजावट एवं होर्डिंग्स के माध्यम से संत रविदास जी के 650वें जयंती वर्ष का संदेश प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है।
सीर गोवर्धनपुर में बनेंगे आठ स्वागत द्वार
जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर में आने वाले श्रद्धालुओं और अतिथियों के स्वागत के लिए आठ प्रमुख स्थानों पर गेट बनाए गए है। इनमें सीर गेट, रविदास मंदिर के पास, रविदास स्कूल के पास, रविदास पार्क के पास, सहज एकेडमी के पास वीआईपी गेट, काशीपुरम कॉलोनी के ठीक सामने, लौटूबीर बाबा मंदिर के पास तथा डाफी टोल प्लाजा के पास स्वागत द्वार बने है। इन स्वागत द्वारों को जयंती समारोह की थीम और संत रविदास जी के संदेश के अनुरूप आकर्षक रूप दिया गया है।
बीएचयू सीर गेट से कार्यक्रम स्थल हुआ जगमग
समारोह क्षेत्र में प्रकाश और सजावट की विशेष व्यवस्था की गई है। बीएचयू सीर गेट से रविदास पार्क होते हुए कार्यक्रम स्थल तक झालर एवं विद्युत लाइटिंग की विशेष व्यवस्था की गयी है । इसके साथ ही रविदास पार्क में अलग से झालर और लाइट की सजावट की गयी है, यह पार्क 29 जुलाई की शाम 11000 दीपों से जगमगाएगा । इसके साथ ही रविदास मंदिर को भी विशेष झालर और रोशनी से सजाया गया है । इससे जन्मस्थली और आसपास का पूरा क्षेत्र रात में भी आकर्षण का केंद्र बनेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

