नव संवत्सर पर ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने किया सनातनी पंचांग का विमोचन
-'रौद्र संवत्सर' पर दिया संदेश,'गविष्ठि वर्ष' के धर्मयुद्ध का शंखनाद
वाराणसी, 19 मार्च (हि.स.)। सनातनी नव संवत्सर 'रौद्र' (विक्रमी २०८३) के पावन अवसर पर गुरूवार को ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने शंकराचार्य घाट पर सनातनी पंचांग का विमोचन किया। शंकराचार्य की मौजूदगी में प्रातर्मंगलम के 20वें वार्षिकोत्सव पर बटुकों ने नववर्ष के नव सूर्य को प्रथम अर्घ्य दिया।
इस अवसर पर शंकराचार्य ने विश्व के सनातन धर्मावलंबियों के नाम अपना वार्षिक संदेश भी जारी किया। शंकराचार्य ने अपने ज्योतिष्पीठारोहण के साढ़े तीन वर्षों की यात्रा का विवरण प्रस्तुत करते हुए देश की राजनीति और वैश्विक संघर्षों पर धर्म-सम्मत दिशा-निर्देश भी दिया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने संदेश का आरंभ सूक्ष्म काल-गणना के साथ किया।
उन्होंने बताया कि 12 सितम्बर 2022 को पीठ का उत्तरदायित्व संभालने से लेकर 19 मार्च के सूर्योदय तक कुल 1284 दिन(3 वर्ष,6 मास, 1 सप्ताह, 4 दिन, 15 घण्टे और 38 मिनट) का समय धर्म की मर्यादा और लोक-कल्याण के लिए समर्पित रहा है।
— साढ़े तीन वर्षों के प्रमुख सेवा-प्रकल्प
विगत 1284 दिनों की उपलब्धियों को बताते हुए शंकराचार्य ने बताया कि काशी के निकट 1008 एकड़ में वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के वैश्विक केंद्र जगद्गुरुकुलम् का निर्माण द्रुत गति से जारी है। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में सामूहिक अनुष्ठान की शक्ति का प्रतीक सवा लाख शिवलिंग मन्दिर अपने अन्तिम चरण में है। सनातन की ध्वजा अक्षुण्ण रखने के लिए 50 से अधिक विरक्त शिष्यों को तैयार किया गया है।
—धर्म-जागृति यात्रा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनुसार, संपूर्ण भारत में 2,००,००० किलोमीटर से अधिक की अनवरत यात्रा संपन्न की है। गौ-प्रतिष्ठा अभियान में 06 करोड़ आहुतियों वाला महायज्ञ, देशव्यापी ध्वज स्थापना यात्रा और वृंदावन से दिल्ली तक की पदयात्रा द्वारा जन-चेतना का विस्तार किया गया।
-राजनीति और 'गो-मतदाता' का आह्वान
राजनीति को धर्म के अनुशासन में लाने के लिए शंकराचार्य ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब हिंदू समाज केवल 'वोट बैंक' नहीं रहेगा। उन्होंने प्रत्येक भारतीय को 'सनातनी राजनीति' करने और 'गो-मतदाता' बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सनातनी मत केवल उसे प्राप्त होगा जो गौ-माता को 'राष्ट्रमाता' का विधिक सम्मान दिलाने और गोवंश की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध का साहस दिखाएगा। अमेरिका और ईरान के मध्य बढ़ते तनाव पर उन्होंने 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का विचार प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि किसी भी स्वतंत्र देश की संप्रभुता पर आक्रमण करना घोर अन्याय और अधर्म है।
— 'रौद्र संवत्सर' और 'गविष्ठि' धर्मयुद्ध
आगामी नूतन वर्ष को 'गविष्ठि वर्ष' के रूप में अंगीकार करते हुए शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश में 81 दिवसीय गविष्ठि यात्रा और प्रत्यक्ष 'गोरक्षा धर्मयुद्ध' की घोषणा की। इसके लिए 'शंच = शंकराचार्य चतुरंगिणी' सेना का गठन पंचमी तिथि से आरम्भ किया जाएगा। 'शं' (कल्याण) और 'च' (समुच्चय) के भाव के साथ यह कल्याणकारी सेना गौ-वंश के संरक्षण के लिए समर्पित होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

