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दार्शनिक प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल को ‘स्वामी प्रणवानन्द दर्शन पुरस्कार 2026’ मिलेगा

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दार्शनिक प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल को ‘स्वामी प्रणवानन्द दर्शन पुरस्कार 2026’ मिलेगा


संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के लिए गौरव का क्षण: कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा

वाराणसी,17 मार्च (हि.स.)। भारतीय दर्शन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के तुलनात्मक धर्म एवं दर्शन विभाग के विभागाध्यक्ष, दर्शन संकाय प्रमुख प्रोफेसर रजनीश कुमार शुक्ल को ‘स्वामी प्रणवानन्द दर्शन पुरस्कार–2026’ से सम्मानित किया जाएगा। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा महाराष्ट्र के पूर्व कुलपति रहे प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल को अखिल भारतीय दर्शन परिषद ने यह पुरस्कार देने की घोषणा की है। आगामी 23 से 25 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ स्थित जयप्रकाश विश्वविद्यालय में आयोजित परिषद के 70वें अधिवेशन के दौरान यह सम्मान उद्घाटन सत्र में प्रदान किया जाएगा। प्रो.शुक्ल को सम्मान के लिए चयनित होने पर सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारीलाल शर्मा ने प्रसन्नता व्यक्त की। मंगलवार को कुलपति ने अपने कार्यालय में प्रो.शुक्ल को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि प्रोफेसर रजनीश कुमार शुक्ल को प्राप्त होने वाला यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत विद्वत्व का सम्मान है, बल्कि संपूर्ण विश्वविद्यालय परिवार के लिए भी अत्यंत गौरव का विषय है। भारतीय दर्शन विश्वमानव के लिए शाश्वत मार्गदर्शन का स्रोत है और ऐसे विद्वानों के माध्यम से हमारी प्राचीन ज्ञान परम्परा की प्रतिष्ठा निरंतर बढ़ रही है। कुलपति ने विश्वास व्यक्त किया कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को भारतीय दर्शन के अध्ययन एवं अनुसंधान के लिए प्रेरित करेगी। प्रो. शुक्ल को इस सम्मान की घोषणा के बाद विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्वत् समाज में हर्ष का वातावरण है।

बताते चले कि प्रो.रजनीश कुमार शुक्ल भारतीय दर्शन, तुलनात्मक धर्म तथा भारतीय बौद्धिक परम्परा के विद्वान हैं। उनके द्वारा किए गए शोध एवं लेखन ने भारतीय दर्शन की समृद्ध परम्परा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्रदान की है। अभी कुछ दिनों पूर्व प्रो.शुक्ल की पांच पुस्तकों का नई दिल्ली में लोकार्पण भी हुआ है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी