कैंडल मार्च निकाल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, शिक्षा नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन
वाराणसी, 17 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में साझा संस्कृति मंच के बैनर तले शुक्रवार शाम कचहरी स्थित अंबेडकर पार्क में देश में गहराते शिक्षा संकट, लगातार हो रहे परीक्षा-पत्र लीक, शिक्षा के बढ़ते निजीकरण तथा लोकतांत्रिक आवाज़ों के दमन के विरोध में सभा आयोजित की गई। सभा के बाद प्रतिभागियों ने कैंडल मार्च निकालकर केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों के खिलाफ विरोध दर्ज कराया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
सभा को संबोधित करते हुए पादरी आनंद ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में देश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताएं, सरकारी विद्यालयों को बंद करने की नीतियां, शिक्षा की बढ़ती लागत तथा नई शिक्षा नीति की कमियों ने करोड़ों छात्रों और युवाओं के भविष्य को असुरक्षित बना दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में शिक्षा मंत्री का पद पर बने रहना नैतिक रूप से उचित नहीं है।
सामाजिक कार्यकर्ता धनंजय त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में देशभर में 94 हजार से अधिक सरकारी विद्यालय बंद हुए हैं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है, जबकि निजी विश्वविद्यालयों, सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों और कोचिंग उद्योग को बढ़ावा दिए जाने से शिक्षा आम लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही है। उनका कहना था कि गरीब, दलित, पिछड़े, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के अवसर लगातार सीमित हो रहे हैं।
जागृति राही ने लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, छात्रनेता नेहा, मनीष तथा अन्य युवाओं के आंदोलनों के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।
नंदलाल मास्टर ने कहा कि नई शिक्षा नीति शिक्षा को वैज्ञानिक, लोकतांत्रिक और समतामूलक बनाने के बजाय उसे केंद्रीकृत, बाजारोन्मुख और वैचारिक नियंत्रण का माध्यम बना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता कमजोर की जा रही है तथा कुलपतियों एवं अन्य महत्वपूर्ण शैक्षणिक पदों पर योग्यता और अकादमिक स्वतंत्रता के बजाय वैचारिक निकटता को प्राथमिकता दिए जाने के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं।
अधिवक्ता अबु हाशमी ने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय पर हुई बुलडोजर कार्रवाई शैक्षणिक संस्थानों पर दमन का उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि शैक्षणिक परिसरों में बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप से शिक्षा संस्थानों की स्वतंत्रता और आलोचनात्मक चिंतन की परंपरा प्रभावित हो रही है।
कार्यक्रम के अंत में निर्णय लिया गया कि शिक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर 19 जुलाई को शास्त्री घाट पर एक दिवसीय उपवास किया जाएगा।
सभा में विनय राय 'मुन्ना', गगन, सिस्टर फ्लोरिन, गौरव, डॉ. अनूप श्रमिक, नीति, जितेंद्र, महेंद्र सहित अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

