पूर्वांचल में नदियां उफान पर, वाराणसी समेत कई जिलों में बढ़ा गंगा का जलस्तर,घाटों पर बढ़ी सतर्कता
—मोक्षतीर्थ मणिकर्णिकाघाट पर शवदाह के प्लेटफार्म भी अब डूबने के कगार पर
वाराणसी, 07 अगस्त (हि.स.)। पहाड़ी क्षेत्रों के साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश का असर अब पूरे पूर्वांचल की नदियों पर साफ दिखाई देने लगा है। वाराणसी सहित गाजीपुर, बलिया, मीरजापुर, प्रयागराज, जौनपुर और आजमगढ़ में गंगा तथा उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। हालांकि वाराणसी में फिलहाल गंगा खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही है, लेकिन बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है।
वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार एक से दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार, शुक्रवार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 62.91 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर और खतरे के निशान 71.262 मीटर से काफी नीचे है। इसके बावजूद गंगा के बढ़ते प्रवाह का असर घाटों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
वाराणसी के शिवाला समेत कई घाटों के संपर्क मार्गों पर पानी पहुंचने लगा है। अहिल्याबाई, शीतला, दशाश्वमेध और त्रिपुरा भैरवी घाट की निचली सीढ़ियां गंगा में समा चुकी हैं। मोक्षतीर्थ मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट पर स्थित शवदाह प्लेटफॉर्म तक गंगा की लहरें पहुंच गई हैं और दोनों स्थानों पर जलस्तर लगातार बढ़ने से स्थिति पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। कई घाटों की चौकियां तथा किनारे स्थित छोटे-छोटे मंदिर भी जलमग्न हो चुके हैं।
पूर्वांचल के अन्य जिलों में भी नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार सुबह आठ बजे गाजीपुर में गंगा का जलस्तर 55.64 मीटर, बलिया में 53.36 मीटर, मीरजापुर में 68.02 मीटर और प्रयागराज में 75.23 मीटर दर्ज किया गया। फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 78.83 मीटर पर स्थिर रहा।
सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि उसकी सहायक नदियां भी उफान पर हैं। आजमगढ़ में छोटी सरयू का जलस्तर 66.94 मीटर दर्ज किया गया, जबकि जौनपुर में गोमती नदी का जलस्तर बढ़कर 68.06 मीटर पहुंच गया है। वहीं सोनभद्र स्थित रिहंद डैम का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है और शुक्रवार सुबह यह 258.38 मीटर दर्ज किया गया। केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार डैम का अधिकतम जलस्तर 271.27 मीटर है।
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन, जल पुलिस, एनडीआरएफ, पीएसी और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। राजघाट से अस्सी घाट तक स्नानार्थियों की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी की जा रही है। घाटों पर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और लोगों से नदी के किनारे अनावश्यक रूप से नहीं जाने की अपील की जा रही है।
मां गंगा निषाद राज सेवा समिति के कार्यकारिणी सदस्य जितेंद्र कुमार निषाद 'बम्बू' ने बताया कि नाविक समाज भी सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन कर रहा है। नावों में क्षमता से कम यात्रियों को बैठाया जा रहा है तथा सभी यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनाकर ही नौकायन कराया जा रहा है। जिला प्रशासन ने गंगा के सभी 84 घाटों पर संचालित नाविकों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
मौसम विभाग ने भी अगले 24 घंटों के दौरान वाराणसी और आसपास के जिलों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। यदि वर्षा का सिलसिला जारी रहा तो गंगा, वरुणा, गोमती और छोटी सरयू सहित पूर्वांचल की प्रमुख नदियों का जलस्तर और बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने तथा नदी किनारे अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की है।----------------
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

