home page

वाराणसी : राणीसती मंदिर में 'भादीमावस उत्सव' मना, विशेष श्रृंगार झांकी देख श्रद्धालु निहाल

 | 
वाराणसी : राणीसती मंदिर में 'भादीमावस उत्सव' मना, विशेष श्रृंगार झांकी देख श्रद्धालु निहाल


— 13 दम्पति परम्परागत परिधान में पदयात्रा करते हुए मंगलकलश व ध्वज लेकर मंदिर पहुंचे,सामूहिक मंगल पाठ

वाराणसी, 11 सितम्बर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद में रामकटोरा स्थित श्री राणीसती दादी मंदिर में प्रति वर्ष की भांति भाद्रपद अमावस्या पर शुक्रवार को पूरे आस्था और उल्लास के साथ 'भादीमावस उत्सव' मनाया गया। उत्सव में सुबह आठ बजे 13 दम्पति परम्परागत परिधान में पदयात्रा करते हुए मंगलकलश व ध्वज लेकर राणीसती मंदिर पहुंचे। मंगल कलश व ध्वजधारी दम्पतियों का स्वागत मंदिर समिति के अध्यक्ष रमेश चौधरी, दीपक बजाज व आनंद अग्रवाल ने पुष्पवर्षा से किया। भादीमावस उत्सव के अवसर पर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओ में युवा दम्पत्तियों की भागीदारी अधिक रही।

राणीसती मंदिर में विवाहित लोगों द्वारा जोड़े से पूजन-अर्चन की परम्परा है। सुबह पांच बजे मंगला आरती के साथ ही दम्पतियों ने राणीसती दादी का पूजन-अर्चन शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं को कतारबद्ध दर्शन पूजन कराया गया। गोपाल तुलस्यान, मनोज अग्रवाल व अशोक गिनोड़िया ने यह भूमिका संभाली। पूजन-अर्चन के बाद श्रद्धालुओ को संजय झुनझुनवाला मिठी बुंदिया व मेवा का पैकेट प्रदान कर रहे थे। इसके बाद मंदिर में अपराह्न दो से तीन बजे के बीच सौ से भी अधिक महिलाओं ने सामूहिक मंगल पाठ किया। इसके बाद राजस्थानी गायिका द्वय मितू गड्डायन व कंचन पांडेय ने राणी सती के जन्म की प्रेरक यात्रा को जीवंत करते हुए मंगलपाठ के माध्यम से एक महिला की अटूट भावना, प्रेम, दृढ़संकल्प, शाश्वत शक्ति और भक्ति के सार को प्रस्तुत किया। मितू गड्डायन व कंचन पांडेय ने संगीतमय माहौल में भजनों के माध्यम से दादी की महिमा सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। श्री राणीसती दादी के रूप में पूजनीय नारायणी देवी को महाभारत के अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के पुनर्जन्म की मान्यता है।

सामूहिक मंगलपाठ की व्यवस्था निधिदेव अग्रवाल, आलोक मोदी, रवि बूबना व महेश टेकरीवाल ने संभाल रखी थी। इसके बाद सायंकालीन भजनों की प्रस्तुति भी राजस्थानी गायिका द्वय ने किया। इसके पहले राणीसती श्याम सेवा ट्रस्ट के भजन कलाकारों का स्वागत संजय झुनझुनवाला, केशव जालान एव॔ निधिदेव अग्रवाल ने पुष्प गुच्छ एवं अंगवस्त्रम से किया। मंदिर में विशेष श्रृंगार झांकी के बाद सायंकालीन महाआरती के साथ सवामनी प्रसाद वितरण भी हुआ। कार्यक्रम के आयोजकों के अनुसार

रामकटोरा स्थित प्राचीन राणीसती मंदिर में वर्ष 1955 से प्रति वर्ष भाद्रपद अमावस्या को 'भादीमावस उत्सव' मनाया जाता है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी