श्री काशी विश्वनाथ धाम में शिवभक्तों ने खेली फूलों की होली,भक्तों में उल्लास,गर्भगृह में चढ़ा गुलाल
-चौसट्टी देवी के दरबार में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़,चरणों में अबीर गुलाल चढ़ा
वाराणसी, 04 मार्च (हि.स.)। रंगों के पर्व होली पर बुधवार शाम उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी (वाराणसी) स्थित श्री काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं ने फूलों की होली खेली। मंदिर में कतारबद्ध श्रद्धालुओं पर भी गुलाब की पंखुड़िया बरसाई गई। धाम परिसर में शिवभक्ति भरे गीतों और ढोल-नगाड़ों की धुन पर श्रद्धालु देर तक थिरकते रहे। फूलों से सजी होली धाम परिसर के शंकरचार्य चौक पर आयोजित की गईं। पर्व पर मंदिर न्यास की ओर से मंदिर के गर्भगृह में स्थित बाबा के पावन ज्योर्तिलिंग पर गुलाल अर्पित किया गया। गर्भगृह परिसर गुलाल से रंगा नजर आया।
उधर,परम्परानुसार होली पर्व पर शाम चौसट्टीघाट स्थित चौसट्टी देवी के दरबार में अबीर गुलाल चढ़ाने आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। लोग अपरान्ह से ही दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचने लगे । महिला श्रद्धालुओं की भी भीड़ मंदिर में उमड़ पड़ी। बताते चले काशी में पर्व पर चौसट्टी देवी के दर्शन करने की विशेष मान्यता हैं। परम्परागत तरीके से मां के श्रीचरणों में अबीर गुलाल अर्पित करने के बाद मंदिर में परिक्रमा कर लोग आह्लादित रहे।
काशी में मान्यता हैं कि राजा दिवोदास का मतिभ्रम करने के लिए स्वयं महादेव ने 64 योगीनियों को काशी भेजा था। काशी की समरसता, धार्मिकता के मोहपाश में योगिनी बंध गयी और काशी में ही बस गयी। अन्तत: शिवशंकर को ब्रह्मा जी के माध्यम से काशी मेें पुन: प्रवेश का अवसर मिला। एक अन्य कथा है काशी के महाप्रतापी राजा दिवोदास ने एक समय काशी पुराधिपति के आधिपत्य को चुनौती दे दी थी। उसने बाबा की नगरी के शिवतत्व को क्षीण करने का भी प्रयास किया। उसे अपदस्थ करने के लिए भगवान शिव ने कैलाश शिखर से पहले अष्ट भैरवों व छप्पन विनायकों को काशी भेजा जो बाद में यहीं स्थापित हो गए।
इसी क्रम में चौंसठ योगिनियों ने भी काशी प्रवास किया व बाबा विश्वनाथ के दोबारा काशी पधारने के बाद उनकी कृपा से यहीं पूजित व प्रतिष्ठित हुईं। पुराणों और काशी खंड में भी इन चौंसठ योगिनियों की महिमा बखानी गई है। इस मंदिर का इतिहास लगभग पांच सौ साल से भी अधिक प्राचीन है। इसका निर्माण बंगाल के राजा प्रतापदित्य ने कराया था। मंदिर के प्रवेश द्वार पर सिंहवाहिनी मां दुर्गा विराजमान हैं।
रंगोंत्सव पर बाबा कालभैरव, मां अन्नपूर्णा, महामृत्युंजय मंदिर, मां शीतला, मां संकठा, मां पिताम्बरा, मां मंगला गौरी, मां दुर्गा, मां महालक्ष्मी, श्री बटुक भैरव, मां कामाख्या, श्री विश्वनाथ मंदिर (बीएचयू) बाबा कीनाराम दरबार, अघोर दरबार पड़ाव सहित में भी भक्तों ने आस्था के साथ अबीर अर्पित किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

