दरोगा भर्ती परीक्षा में “पंडित” शब्द के प्रयोग को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग
वाराणसी के थाना कैंट में पहुंचे समाज के लोग
वाराणसी, 15 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश पुलिस के उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में “पंडित” शब्द को कथित रूप से शामिल किए जाने को लेकर विवाद थम नहीं रहा। रविवार को इस मामले को लेकर ब्राम्हण समाज का एक प्रतिनिधिमंडल थाना कैंट पहुंचा । इस मामले में मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग करते हुए प्रतिनिधि मंडल ने विस्तृत प्रार्थना पत्र थाना प्रभारी को सौंपा। दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि 14 मार्च को उत्तर प्रदेश में पुलिस विभाग के महत्वपूर्ण पद दरोगा ( उपनिरीक्षक ) की भर्ती के लिए आयोजित लिखित परीक्षा के हिंदी प्रश्नपत्र में “अवसरवादी” शब्द के विकल्पों में “पंडित” शब्द को शामिल किया गया।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि “पंडित” शब्द भारतीय समाज में परंपरागत रूप से विद्वानों एवं ब्राह्मण समाज के लिए प्रयुक्त होने वाला एक सम्मानसूचक संबोधन है, जो ज्ञान, विद्वता और परंपरा का प्रतीक माना जाता है। ऐसे सम्मानित शब्द को नकारात्मक अर्थ वाले शब्द के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जाना समाज के एक बड़े वर्ग की सामाजिक प्रतिष्ठा और भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित होने वाली यह परीक्षा प्रदेश की अत्यंत महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं में से एक है, जिसमें लाखों अभ्यर्थी सम्मिलित होते हैं। ऐसी स्थिति में प्रश्नपत्रों की तैयारी अत्यंत सावधानी और बहुस्तरीय प्रक्रिया के तहत की जाती है। सामान्यतः विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रश्न तैयार किए जाते हैं, उसके पश्चात मॉडरेशन समिति द्वारा उनका परीक्षण किया जाता है तथा अंततः संबंधित अधिकारियों की स्वीकृति के बाद ही प्रश्नपत्र को अंतिम रूप दिया जाता है। इसके बावजूद इस प्रकार का आपत्तिजनक प्रश्न शामिल होना गंभीर लापरवाही अथवा दुर्भावनापूर्ण कृत्य की आशंका को दर्शाता है।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के जिम्मेदार अधिकारियों, प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विषय विशेषज्ञों, मॉडरेशन समिति के सदस्यों तथा परीक्षा आयोजन से संबंधित एजेंसी के जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विधिसम्मत मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि इस प्रकरण में समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई तो समाज के लोग उच्च पुलिस अधिकारियों एवं सक्षम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए बाध्य होंगे। प्रतिनिधिमंडल में शशांक शेखर त्रिपाठी, राजेश कुमार त्रिवेदी, संतोषी शुक्ला, अरुण कुमार मिश्रा, आशुतोष शुक्ला, नीरज चौबे (सोनू ), उपेंद्र निगम, शिवेंद्र कुमार दुबे आदि शामिल रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

