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वाराणसी: समान शिक्षा की मांग के साथ बनारस में पदयात्रा, बीएचयू में बुधवार को होगा समापन

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वाराणसी: समान शिक्षा की मांग के साथ बनारस में पदयात्रा, बीएचयू में बुधवार को होगा समापन


वाराणसी, 14 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. संदीप पांडेय के नेतृत्व में समान शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर निकाली जा रही तीन दिवसीय पदयात्रा मंगलवार को दूसरे दिन कोरौती गांव से शुरू हुई। यह यात्रा लोकबंधु राजनारायण के पैतृक गांव गंजारी पहुंचेगी, जहां रात्रि विश्राम के बाद अंतिम दिन बुधवार को पदयात्री काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के लंका स्थित सिंहद्वार पहुंचकर यात्रा का समापन करेंगे।

इस पदयात्रा में साझा संस्कृति मंच, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम), सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) और ग्रीन पार्टी के कार्यकर्ता शामिल हैं। पदयात्रा के आयोजन से जुड़े नंदलाल मास्टर ने बताया कि अभियान की शुरुआत सोमवार को उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली लमही में आयोजित जनसभा से हुई थी। पहले दिन पदयात्रा लमही से जनकवि सुदामा पाण्डेय 'धूमिल' के गांव खेवली तक निकाली गई।

नंदलाल मास्टर ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने अपने साहित्य और जीवन-दर्शन में शिक्षा को केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, नैतिक चेतना और मानवीय समानता की आधारशिला बताया है। उनकी रचनाओं में गांव, किसान, मजदूर, महिलाओं और वंचित वर्ग की पीड़ा के साथ शिक्षा के लोकतांत्रिक महत्व को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की 'नई तालीम' भी मातृभाषा, श्रम, स्थानीय ज्ञान, नैतिक मूल्यों और समाज से जुड़ी समान शिक्षा की अवधारणा पर आधारित थी। वर्तमान समय में जब शिक्षा का तेजी से बाजारीकरण हो रहा है, तब प्रेमचंद और गांधी की शिक्षा-दृष्टि पहले से अधिक प्रासंगिक हो गई है। उनका मानना था कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब अमीर-गरीब, शहर-गांव सहित समाज के सभी वर्गों के बच्चों को समान गुणवत्ता की शिक्षा उपलब्ध होगी।

उन्होंने कहा कि शिक्षा सामाजिक असमानताओं को दूर करने का सबसे प्रभावी माध्यम है और इसी के जरिए एक समानतामूलक समाज की स्थापना संभव है। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए मुंशी प्रेमचंद, सुदामा पाण्डेय 'धूमिल', लोकबंधु राजनारायण और आचार्य नरेन्द्र देव से प्रेरणा लेकर समान शिक्षा की मांग के समर्थन में यह पदयात्रा आयोजित की जा रही है।

पदयात्रियों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'काकरोच जनता पार्टी' के धरने के प्रति भी समर्थन व्यक्त किया। साथ ही शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्था और जवाबदेही के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।

पदयात्रा में डॉ. संदीप पांडेय, नंदलाल मास्टर, फादर आनंद, फादर प्रवीण, रामजनम यादव, अजित गौरव, आजाद गौतम, प्रमोद, रंजीत, गणेश, विजय, हीरा यादव, अवधेश यादव, अनिल मौर्य, मधुबाला, मनीषा, सीमा, अनीता, आशा राय, नेहा, काजल और ज्योति सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता एवं नागरिक शामिल रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी