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भारत की संस्कृति शाश्वत और अनादि अनंत है: अमिताभ अग्निहोत्री

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भारत की संस्कृति शाश्वत और अनादि अनंत है: अमिताभ अग्निहोत्री


—एक दिवसीय व्याख्यान में 21वीं सदी में सांस्कृतिक विमर्श एवं नवाचार पर मंथन

वाराणसी, 16 मई (हि.स.)। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, वाराणसी की पहल पर शब्दन फाउंडेशन के सहयोग से शनिवार को एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। “21वीं सदी में सांस्कृतिक विमर्श एवं नवाचार” विषयक व्याख्यान में संस्कृति को सहेजने और इसे अगली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखने पर बल दिया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री (चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ, राष्ट्रवाणी समाचार चैनल) ने काशी को भारतीय सांस्कृतिक ऊर्जा और चेतना का शाश्वत केन्द्र बताया। उन्होंने कहा कि काशी ने राजनीति, अर्थव्यवस्था और धर्म के मध्य संतुलित समन्वय स्थापित कर भारतीय संस्कृति को नवीन आयाम प्रदान किए हैं। मुख्य अतिथि अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र, बीएचयू के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने कहा कि “संस्कृति को सहेजना अगली पीढ़ी के लिए समाज को सुरक्षित रखने का मूल लक्ष्य है।” अध्यक्षता कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू, के प्रो० गुरु प्रसाद सिंह ने की। क्षेत्रीय केन्द्र के निदेशक डॉ अभिजित् दीक्षित ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि “काशी संस्कृति का जीवन्त प्रतिनिधि है, एवं हम इसे संस्कार के रूप में स्वीकार करते हैं।” अतिथियों का माल्यार्पण एवं स्मृति-चिन्ह भेंटकर अभिनन्दन किया गया। शब्दन फाउंडेशन की ओर से वरिष्ठ कला-प्रशासक गौतम चटर्जी (आईजीएनसीए) को उनके दीर्घ सेवाकाल के लिये सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ देवी सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। मंगलाचरण वृहस्पति पाण्डेय ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ० शिवेन्द्र सिंह व धन्यवाद ज्ञापन गौतम चटर्जी ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी