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धर्म नगरी काशी में सजा ओडिशा का रंग, यूपी-ओडिशा पर्यटन रिश्तों को नई उड़ान

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—ओडिशा परब में संस्कृति, खानपान, हस्तशिल्प और पर्यटन का संगम, मंत्री जयवीर सिंह ने किया संबोधित

वाराणसी, 22 अगस्त (हि.स.)। बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी (काशी) में इन दिनों ओडिशा की संस्कृति, कला, खानपान और पर्यटन की खूबसूरत झलक देखने को मिल रही है। 22 से 24 अगस्त तक बड़ालालपुर स्थित पं. दीनदयाल हस्तकला संकुल में आयोजित ‘ओडिशा परब’ उत्तर प्रदेश और ओडिशा की दो समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के मिलन का मंच बना है।

शनिवार को कार्यक्रम में शामिल उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ओडिशा परब महज तीन दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि दोनों राज्यों के बीच पर्यटन सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि काशी और पुरी, अयोध्या और कोणार्क जैसे आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र दोनों राज्यों की साझा विरासत और पर्यटन संभावनाओं को दर्शाते हैं। उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिकता, विरासत, लोक संस्कृति और खानपान तथा ओडिशा की समुद्री विरासत, प्रकृति, मंदिर, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प और हथकरघा एक-दूसरे के पूरक हैं। ऐसे में दोनों राज्य मिलकर नए टूरिज्म सर्किट, संयुक्त प्रचार अभियान, ट्रैवल ट्रेड मीट और बी2बी संवाद को आगे बढ़ा सकते हैं।

—पर्यटकों को मिलेगा ‘दो राज्यों का एक अनुभव’

जयवीर सिंह ने कहा कि हमारा प्रयास होना चाहिए कि उत्तर प्रदेश आने वाला पर्यटक ओडिशा के पर्यटन स्थलों से परिचित हो और ओडिशा आने वाला पर्यटक उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का अनुभव करे। इससे दोनों राज्यों के बीच पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और होटल, हॉस्पिटैलिटी, परिवहन, हस्तशिल्प, खानपान तथा स्थानीय कारोबार से जुड़े लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे।

—यूपी में पर्यटन ने बनाया नया रिकॉर्ड

पर्यटन मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश पर्यटन को विकास, रोजगार और निवेश का मजबूत आधार बनाया जा रहा है। प्रदेश में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2022 में करीब 32 करोड़, 2023 में 48 करोड़, 2024 में लगभग 65 करोड़ और वर्ष 2025 में रिकॉर्ड करीब 156 करोड़ पर्यटकों का आगमन हुआ। वर्ष 2026 में जून तक 41 करोड़ से अधिक पर्यटक प्रदेश पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन को विजन-2047 और वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। पर्यटन अब केवल घूमने-फिरने तक सीमित नहीं, बल्कि स्थानीय रोजगार, निवेश, हस्तशिल्प और अर्थव्यवस्था को गति देने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।

—सारनाथ की वैश्विक पहचान से बौद्ध पर्यटन को नई ताकत

जयवीर सिंह ने कहा कि सारनाथ का यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होना उत्तर प्रदेश के पर्यटन के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे प्रदेश के बौद्ध पर्यटन को नई वैश्विक पहचान मिली है और जापान सहित दुनिया के बौद्ध देशों से पर्यटकों को आकर्षित करने की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।

—‘घूमने’ से आगे ‘अनुभव’ तक पहुंच रहा पर्यटन

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अब पर्यटकों को केवल मंदिर और स्मारक दिखाने तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि उन्हें संस्कृति, खानपान, कला, शिल्प और स्थानीय जीवन का अनुभव देने पर जोर है। काशी की सिल्क, मुरादाबाद का पीतल, भदोही की कालीन और कन्नौज का इत्र जैसे स्थानीय उत्पाद पर्यटन अनुभव का हिस्सा बन रहे हैं। ओडिशा परब में ओडिसी, गोटीपुआ, संबलीपुरी, घूमरा, ढेमसा और पाइका अखाड़ा जैसी प्रस्तुतियां ओडिशा की जीवंत सांस्कृतिक विरासत को सामने ला रही हैं। वहीं छेना पोड़ा और रसगुल्ला जैसे पारंपरिक व्यंजन काशीवासियों और पर्यटकों को ओडिशा के स्वाद से परिचित करा रहे हैं। पर्यटन मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को ऐसे आयोजन नई मजबूती देते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि काशी में आयोजित ओडिशा परब उत्तर प्रदेश और ओडिशा के बीच पर्यटन, संस्कृति, निवेश और जन-जन के संबंधों को नई ऊंचाई देगा।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी