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(अपडेट) ‘पंच परिवर्तन’ से बदलेगी पत्रकारिता की दिशा, सकारात्मकता ही बचाएगी साख : जितेंद्र तिवारी

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(अपडेट) ‘पंच परिवर्तन’ से बदलेगी पत्रकारिता की दिशा, सकारात्मकता ही बचाएगी साख : जितेंद्र तिवारी


(अपडेट) ‘पंच परिवर्तन’ से बदलेगी पत्रकारिता की दिशा, सकारात्मकता ही बचाएगी साख : जितेंद्र तिवारी


—पत्रकारिता की असली ताकत समाज का विश्वास है और यही उसकी सबसे बड़ी पूंजी भी

—देवर्षि नारद जयंती संगोष्ठी एवं पत्रकार सम्मान समारोह में हिन्दुस्थान समाचार के संपादक बाेले

वाराणसी ,03 मई (हि.स.)। पत्रकारिता आज मिशन से हटकर कमीशन की ओर बढ़ती दिख रही है, जिससे उसकी विश्वसनीयता पर असर पड़ा है। ऐसे में समाज का विश्वास वापस पाना मीडिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। ये उद्गार हिन्दुस्थान समाचार बहुभाषी संवाद समिति के संपादक जितेंद्र तिवारी के हैं। वे महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन पीठ सभागार में रविवार को विश्व संवाद केंद्र काशी,समाजशास्त्र विभाग व मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित देवर्षि नारद जयंती संगोष्ठी एवं पत्रकार सम्मान समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

साथ ही ‘पंच परिवर्तन: समाज एवं मीडिया’ विषय पर अपने विचार रखते हुए तिवारी ने मीडिया की बदलती दिशा, उसकी विश्वसनीयता और समाज के प्रति जिम्मेदारी जैसे अहम विषयों पर बेबाक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की शुरुआत एक मिशन के रूप में हुई थी, जिसका उद्देश्य समाज की आवाज को सत्ता तक पहुंचाना और जनभावनाओं को अभिव्यक्ति देना था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पत्र-पत्रिकाओं ने जनजागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश को एकजुट करने का कार्य किया। मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ संविधान ने नहीं, बल्कि समाज ने बनाया है और उसकी असली ताकत जनता का विश्वास ही है।

संपादक जितेन्द्र तिवारी ने चिंता जताते हुए कहा कि जब मीडिया सत्ता के समीकरणों में उलझ जाता है या केवल नकारात्मकता पर केंद्रित हो जाता है तो उसकी विश्वसनीयता प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि समाज के हित में सकारात्मक और रचनात्मक पत्रकारिता को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है, ताकि अच्छे कार्यों और सकारात्मक बदलावों को भी सामने लाया जा सके।

तिवारी ने उदाहरण देते हुए कहा कि “वंदे मातरम्” जैसे गीत केवल रचनाएं नहीं थे, बल्कि उन्होंने लोगों के भीतर राष्ट्रभाव जागृत कर आजादी की लड़ाई को नई ऊर्जा दी। अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ‘पंच परिवर्तन’ की अवधारणा को पत्रकारिता के लिए मार्गदर्शक बताते हुए जितेंद्र तिवारी ने कहा कि सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्यों जैसे विषयों पर मीडिया की सक्रिय भूमिका जरूरी है। छोटे-छोटे प्रयास भी समाज में बड़े बदलाव ला सकते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि हमें गलत विचारों का त्याग करना होगा। नारद जीवन देने वाले हैं। हमें नारद के गुणों को प्रचारित करना होगा। यही, भविष्य की पत्रकारिता है। कुलपति प्रो. त्यागी ने कहा कि नारद जी को पत्रकार के रूप में स्थापित करना होगा। नारद जी समरसता देखते थे। पत्रकारिता को समरूपता में देखना चाहिए। आपदा को मैनेज करने वाले पत्रकार नारद थे। हमें मानवता को स्थापित करना है। पंच परिवर्तन हमारी सनातन का अस्तित्व है। विशिष्ट अतिथि के रूप में विश्व संवाद केन्द्र न्यास के डॉ हेमंत गुप्त उपस्थित रहे। समारोह में अतिथियों का स्वागत विश्व संवाद केन्द्र, काशी न्यास के सचिव प्रदीप कुमार, विषय प्रस्थापना काशी पत्रकार संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अत्रि भारद्वाज, संचालन कार्यक्रम संयोजक डॉ. अम्बरीष राय ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षाविद, प्राध्यापक और पत्रकार मौजूद रहे।

—इन्हें मिला सम्मान

समारोह में शिवशंकर पाण्डेय, डॉ. जिनेश पटेल, वंदना सिंह, आदर्श कुमार, सुशांत मुखर्जी और अशोक कुमार मिश्र को पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

समारोह में इनकी रही खास मौजूदगी

समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांतरंजन, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र कार्यवाह डॉ वीरेन्द्र जायसवाल, क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष, काशी प्रान्त के प्रान्त प्रचारक रमेश, समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रो. अमिता सिंह, कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह, अर्थशास्त्र विभाग के प्रो.डॉ राकेश तिवारी, महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह आदि की खास मौजूदगी रही।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी