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वाराणसी : 11वीं मोहर्रम पर ,खामोशी से निकला लुटे हुए काफ़िले का जुलूस

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—फातमान पहुंचकर हुआ जुलूस का समापन, 12वीं मोहर्रम पर उठेगा तीजे का जुलूस

वाराणसी, 27 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में 11वीं मोहर्रम पर शनिवार अपरान्ह दालमंडी से लुटे हुए काफ़िले (चुप का डंका) का जुलूस डॉ. मुज्तबा जाफ़री और मुर्तुज़ा जाफ़री के संयोजन में दालमंडी स्थित स्व. डॉ. नाज़िम जाफ़री के निवास से निकला।

जुलूस के आगे-आगे सैयद आबिद नक़वी लुटे हुए काफ़िले के जुलूस का एलान करते हुए चले। जुलूस में आगे—आगे ऊंट था। उस पर बैठे दो नगाड़ेबाज लयबद्ध स्वर में डंका बजा रहे थे। जगह-जगह लोग फरहरा को छूते तो दुलदुल को दुपट्टा, फूल चढ़ाते और दूध, मिठाई, काजू आदि खिला रहे थे। रास्ते में महिलाएं घरों की छतों से जुलूस देख रही थीं। इमाम की शान में लाेग कलाम पढ़ रहे थे। पूरा काफिला खामोश होकर चल रहा था। अंजुमन हैदरी के नौजवान अलम का फरहरा (ध्वज)लहराते हुए चल रहे थे।

हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने बताया कि कर्बला हादसा के बाद जब इमाम हुसैन का लुटा हुआ काफ़िला, यानी अहले-बैत के बच्चे और ख़वातीन क़ैदी बनाकर शाम की ओर रवाना किए गए, उसी ग़मनाक मंज़र की याद में यह जुलूस पूरी ख़ामोशी के साथ निकाला जाता है। रास्ते भर अज़ादार ख़ामोशी के आलम में नातिया कलाम पढ़ते हुए चले और यह जुलूस अपने पारंपरिक रास्तों से होते हुए दरगाहे फातमान पहुँचकर संपन्न हुआ।

—जुलूस में गूंजा हुसैन का नाम

जुलूस के दौरान सरफ़राज़ ने पूरे जुलूस में इमाम हुसैन के नाम को बुलंद रखा और सबको हुसैनियत का पैग़ाम दिया। इस मौक़े पर उन्होंने स्व. नाज़िम जाफ़री और स्व. हकीम मोहम्मद काज़िम के बेहतरीन कलाम भी पेश किए, जिन्हें सुनकर अज़ादारों की आँखें नम हो गईं। सलमान हैदर के अनुसार अज़ाख़ाना-ए-जाफ़री और दरगाहे फातमान में मौलाना वसी असग़र पाशा ने पुरदर्द मजलिस को ख़िताब किया। फातमान में अपने ख़िताब के दौरान उन्होंने कहा कि कर्बला महज़ एक हादसा नहीं, बल्कि इमाम हुसैन का अपने ख़ुदा के साथ बांधा गया एक मुआहिदा (अहद) है, जिसे इमाम ने अपने और अपने अज़ीज़ों के ख़ून से निभाया। उनके इस बयान ने पूरी मजलिस को रुला दिया। दरगाहे फातमान में अज़ादारों ने इमाम हुसैन की बारगाह में सलाम पेश किए। सलाम पढ़ने वालों में समर जाफ़री, सलमान हैदर, हैदर कैरतपुर, अज़ादारे-हुसैनी पद्मश्री ऐनुल हसन रिज़वी और शम्सुल हसन रिज़वी शामिल रहे। पूरे माहौल में ग़म और अक़ीदत की झलक साफ़ नज़र आई और भारी तादाद में अज़ादारों ने जुलूस व मजलिसों में शिरकत कर इमाम हुसैन को खिराजे-अक़ीदत पेश किया।

—बारहवीं मोहर्रम तीजा

हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने बताया कि सोमवार को बारहवीं मोहर्रम पर शहर भर में इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों का तीजा मनाया जाएगा। इस मौक़े पर इमामबाड़ों में फ़ातिहा दिलाई जाएगी, इमाम के फूल की मजलिसें होंगी और तीजे के जुलूस उठाए जाएँगे, जो अपने पारंपरिक रास्तों से होते हुए दरगाहे फातमान और सदर इमामबाड़ा (लाट सरैया) पर शाम को संपन्न होंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी