home page

वाराणसी : अंतिम विदाई से पिंडदान तक निभाया रिश्ता, 52 लावारिस दिवंगतों के लिए पंचगंगा घाट में श्राद्ध

 | 
वाराणसी : अंतिम विदाई से पिंडदान तक निभाया रिश्ता, 52 लावारिस दिवंगतों के लिए पंचगंगा घाट में श्राद्ध


वाराणसी, 07 अक्टूबर (हि.स.)। पितृपक्ष के अवसर पर धर्मनगरी वाराणसी के पंचगंगा घाट पर बुधवार को 52 ज्ञात-अज्ञात दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए तीर्थ श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया गया। खास बात यह रही कि इन दिवंगतों के अंतिम समय में अपना कहने वाला कोई मौजूद नहीं था। करीब एक वर्ष पहले अमन कबीर सेवा न्यास ने इनका अंतिम संस्कार कराया था। अब न्यास ने परिवार की भूमिका निभाते हुए पितृपक्ष में उनके श्राद्ध और पिंडदान की जिम्मेदारी भी निभाई।

न्यास की ओर से वर्षभर में जिन ज्ञात-अज्ञात, लावारिस, अनाथ तथा दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों का अंतिम संस्कार कराया गया था, उन सभी के लिए पंचगंगा घाट पर धार्मिक कर्मकांड संपन्न कराया गया। पंडित वेद आशीष महाराज ने हिंदू परंपरा के अनुसार विधि-विधान से श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कराया।

—जिनका कोई नहीं, उनके लिए परिवार बना न्यास

अमन कबीर सेवा न्यास के अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता अमन कबीर शहर में उन लोगों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाते हैं, जिनका इस दुनिया में कोई अपना नहीं होता। सड़क दुर्घटना में मौत हो या अस्पताल में किसी लावारिस मरीज की मृत्यु, सूचना मिलने पर अमन कबीर अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचते हैं।

न्यास की टीम सबसे पहले मृतक की पहचान और उसके परिजनों की तलाश का प्रयास करती है। पहचान नहीं होने अथवा परिजनों के मौजूद होने के बावजूद शव को छोड़ दिए जाने की स्थिति में कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यास की टीम अंतिम संस्कार कराती है। ऐसे शवों का काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट या हरिश्चंद्र घाट पर हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया जाता है।

—‘मृत्यु के बाद भी कोई लावारिस न कहलाए’

अमन कबीर ने कहा कि जिन लोगों के अंतिम समय में कोई अपना उनके साथ खड़ा नहीं हुआ, उनके लिए काशी में कोई तो अपना होना चाहिए। उनका प्रयास है कि मृत्यु के बाद भी किसी व्यक्ति को ‘लावारिस’ कहलाने की पीड़ा न झेलनी पड़े। इसी भावना के साथ न्यास न केवल ऐसे दिवंगतों का अंतिम संस्कार करता है, बल्कि पितृपक्ष में उनके लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान भी कराता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व है। पितृपक्ष को पूर्वजों और दिवंगत आत्माओं के निमित्त इन धार्मिक संस्कारों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में अमन कबीर सेवा न्यास की यह पहल उन लोगों के लिए अंतिम विदाई के साथ-साथ उनके प्रति सामाजिक और पारिवारिक दायित्व निभाने का भी प्रयास है, जिनके जीवन के अंतिम पड़ाव पर उनका कोई अपना साथ नहीं था।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी