काशी विश्वनाथ धाम में पुलिस कर्मियों को ‘सॉफ्ट स्किल’ प्रशिक्षण, श्रद्धालुओं को मेहमान समझकर ड्यूटी करने का निर्देश
वाराणसी, 16 मार्च (हि.स.)। धर्म नगरी वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ धाम में तैनात पुलिस कर्मियों को बेहतर व्यवहार और जनसंपर्क के लिए तीन दिवसीय “सॉफ्ट स्किल” प्रशिक्षण दिया गया। धाम के त्रयंबकेश्वर हॉल में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतिम दिन सोमवार को पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने सेवा, सुरक्षा और संवेदनशीलता पर विशेष जोर दिया।
पुलिस आयुक्त ने कहा कि धाम में आने वाले श्रद्धालुओं को पुलिसकर्मी अपना मेहमान समझकर ड्यूटी करें। उन्होंने बताया कि विनम्रता, धैर्य और सकारात्मक व्यवहार से न केवल पुलिस की छवि बेहतर बनती है, बल्कि श्रद्धालुओं का अनुभव भी सुखद होता है।
उन्होंने जानकारी दी कि अब धाम में नए पुलिस कर्मियों की तैनाती से पहले दो दिवसीय सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण और पुलिस आयुक्त द्वारा काउंसलिंग अनिवार्य की जाएगी। साथ ही मंदिर परिसर में पुलिस व्यवहार की वास्तविक स्थिति जानने के लिए प्रत्येक सप्ताह कुछ पुलिसकर्मियों को श्रद्धालुओं की वेशभूषा में भेजा जाएगा, जो सामान्य भक्त बनकर व्यवस्थाओं और पुलिस के व्यवहार का फीडबैक जुटाएंगे।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन मुंबई स्थित प्रशिक्षण संस्था ऑयस्टर एचआर सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड की विशेषज्ञ टीम ने किया। समापन समारोह में पुलिस आयुक्त ने संस्था की सीएमडी एवं नेतृत्व-व्यक्तित्व विकास विशेषज्ञ पूजा कृष्णा, प्रशिक्षक दीपशिखा शर्मा तथा सहायक प्रशिक्षक अंजलि मिश्रा को प्रशस्ति पत्र और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।
पुलिस आयुक्त ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर पुलिस की भूमिका केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार भी उतना ही जरूरी है। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के बीच पुलिस का व्यवहार ही प्रशासन की छवि प्रस्तुत करता है, इसलिए पुलिस कर्मियों को विनम्रता और धैर्य बनाए रखना चाहिए।
प्रशिक्षण के दौरान नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग, श्रद्धालुओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार, प्रभावी संवाद कौशल, सकारात्मक भाषा के प्रयोग और सार्वजनिक व्यवहार के माध्यम से पुलिस की सकारात्मक छवि निर्माण पर विशेष चर्चा की गई। इसके साथ ही पुलिस कर्मियों को भीड़ प्रबंधन, तीर्थस्थलों पर व्यवस्था संचालन तथा तनावपूर्ण परिस्थितियों में संयमित और संतुलित प्रतिक्रिया देने के व्यावहारिक उपायों से भी अवगत कराया गया।
कार्यशाला में समूह अभ्यास, संवाद आधारित गतिविधियों और भूमिका-अभिनय के माध्यम से वास्तविक परिस्थितियों में प्रभावी संवाद और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि कठोर या असंवेदनशील संवाद नागरिकों में असंतोष पैदा कर सकता है, जबकि सम्मानजनक और सकारात्मक संवाद कई बार तनावपूर्ण परिस्थितियों को भी सहज बना देता है। इस दौरान अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) शिवहरी मीणा और पुलिस उपायुक्त (सुरक्षा) अनिल कुमार यादव भी मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

