आईएमएस-बीएचयू में अत्याधुनिक ऑर्बिटल नेविगेशन सिस्टम शुरू
- उत्तर प्रदेश में पहली बार शुरू हुई ऑर्बिटल नेविगेशन तकनीक, जटिल सर्जरी में बढ़ेगी सटीकता और सुरक्षा
वाराणसी, 03 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद स्थित चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस), काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के क्षेत्रीय नेत्र विज्ञान संस्थान (आरआईओ) में गुरुवार को अत्याधुनिक ऑर्बिटल नेविगेशन सिस्टम का शुभारंभ किया गया। उत्तर प्रदेश में पहली बार इस तरह की उन्नत ऑर्बिटल नेविगेशन तकनीक की शुरुआत आरआईओ में हुई है। यह तकनीक ऑर्बिटल, क्रेनियोफेशियल और जटिल सर्जरी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
सिस्टम का उद्घाटन बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने किया। इस अवसर पर प्रो. अखिलेश कुमार सिंह, ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन, तथा प्रो. आशीष वर्मा, रेडियोडायग्नोसिस विभाग, ने ऑर्बिटल नेविगेशन सिस्टम की कार्यप्रणाली और इसकी उपयोगिता पर प्रस्तुति दी। इस दौरान जटिल ऑर्बिटल एवं क्रेनियोफेशियल सर्जरी में तकनीक की उन्नत क्षमताओं का प्रदर्शन भी किया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह नेविगेशन सिस्टम सर्जरी के दौरान चिकित्सकों को जटिल शारीरिक संरचनाओं की सटीक पहचान, स्थिति निर्धारण और वास्तविक समय में मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा। मेडिकल इमेजिंग को रियल-टाइम सर्जिकल नेविगेशन से जोड़ने वाली यह प्रणाली जटिल ऑर्बिटल रोगों और चोटों के उपचार में सर्जिकल सटीकता और सुरक्षा बढ़ाने में सहायक होगी।
इन मामलों में होगी विशेष उपयोगी
ऑर्बिटल नेविगेशन सिस्टम का उपयोग ऑर्बिटल ट्यूमर, ऑर्बिटल ट्रॉमा, जटिल क्रेनियोफेशियल चोटों, ऑर्बिटल रिकंस्ट्रक्शन, स्कल-बेस घावों तथा अन्य जटिल ऑर्बिटल स्थितियों के उपचार में किया जा सकेगा। इसके माध्यम से रोगग्रस्त और महत्वपूर्ण शारीरिक संरचनाओं का अधिक सटीक स्थानीयकरण, बेहतर प्री-ऑपरेटिव प्लानिंग तथा ऑपरेशन के दौरान सटीक मार्गदर्शन संभव होगा।
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि अत्याधुनिक तकनीकों को चिकित्सा सेवाओं से जोड़ने का लाभ केवल मरीजों को बेहतर और उच्चस्तरीय उपचार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह सुविधा स्नातकोत्तर विद्यार्थियों, रेजिडेंट्स और चिकित्सकों को इमेज-गाइडेड तथा नेविगेशन-असिस्टेड सर्जरी का प्रशिक्षण देने के साथ क्लिनिकल रिसर्च और नवाचार के लिए भी महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराएगी।
नेत्रदाताओं के परिजनों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के अवसर पर नेत्रदाताओं के परिजनों को सम्मानित भी किया गया। क्षेत्रीय नेत्र विज्ञान संस्थान के अध्यक्ष ने बताया कि देश में करीब 70 लाख लोग कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से प्रभावित हैं और हर वर्ष लगभग 50 हजार नए मामले सामने आते हैं। इसके मुकाबले वर्तमान में देश में प्रतिवर्ष करीब 40 हजार कॉर्निया प्रत्यारोपण किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि देश की जरूरत को पूरा करने के लिए हर वर्ष लगभग दो लाख कॉर्निया दान की आवश्यकता है। उन्होंने समाज के लोगों से स्वैच्छिक नेत्रदान के लिए अधिक से अधिक संख्या में आगे आने का आह्वान किया।कार्यक्रम में प्रो. दीपक मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
इस अवसर पर चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. एस. एन. संखवार, चिकित्सा संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. संजय गुप्ता, सर सुंदरलाल चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. पुनीत, क्षेत्रीय नेत्र विज्ञान संस्थान के विभागाध्यक्ष प्रो. आर. पी. मौर्य समेत विश्वविद्यालय एवं संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक, संकाय सदस्य, रेजिडेंट्स और अन्य लोग उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

