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पूर्वांचल के विद्यालयों में गूंज रही ‘धड़कन’, हृदय स्वास्थ्य के लिए जीवनभर की प्रतिबद्धता

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पूर्वांचल के विद्यालयों में गूंज रही ‘धड़कन’, हृदय स्वास्थ्य के लिए जीवनभर की प्रतिबद्धता


विद्यालयों में हृदय जागरूकता अभियान, बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश

वाराणसी, 17 जनवरी (हि.स.)। पूर्वांचल में बढ़ते हृदयाघात के मामलों को देखते हुए कार्डियोलॉजी विभाग, आईएमएस बीएचयू तथा गृह विज्ञान विभाग, महिला महाविद्यालय (बीएचयू) के संयुक्त तत्वावधान में हृदय जागरूकता अभियान “धड़कन – ए हार्ट हेल्थ इनिशिएटिव” चलाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से विद्यालयी छात्रों को कम उम्र से ही हृदय-स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

अभियान के तहत वाराणसी और आसपास के जिलों के विभिन्न विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। केन्द्रीय विद्यालय पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर (मुगलसराय), सेंट्रल हिन्दू बॉयज़ स्कूल (कमच्छा), राजकीय क्वींस कॉलेज (लहुराबीर) के बाद शनिवार को सेंट्रल हिन्दू गर्ल्स स्कूल, वाराणसी में जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। इसमें छात्राओं को हृदय रोगों के शुरुआती लक्षण, स्वस्थ आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और तनाव प्रबंधन के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।

कार्डियोलॉजी विभाग, बीएचयू के प्रमुख प्रो. विकास अग्रवाल ने बताया कि अब तक इस अभियान के माध्यम से लगभग 1200 छात्रों को कवर किया जा चुका है। सत्रों में भूमिका-निर्माण, पैनल चर्चा, व्याख्यान, प्रदर्शन विधि और प्रश्नोत्तर जैसे इंटरैक्टिव माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे छात्र विषय को सहजता से समझ सकें।

उन्होंने कहा कि भारत में हृदय रोगों का खतरा अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है। बढ़ता तनाव, शारीरिक निष्क्रियता, असंतुलित आहार और तंबाकू सेवन के कारण 20, 30 और शुरुआती 40 वर्ष की आयु के युवाओं में भी हृदयाघात और कार्डियक अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कम उम्र में विकसित होने वाले उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और एथेरोस्क्लेरोसिस जैसे जोखिम कारक आगे चलकर गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। प्रो. अग्रवाल ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (2024) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि विश्वभर में 80 प्रतिशत से अधिक किशोर अनुशंसित शारीरिक गतिविधि स्तर तक नहीं पहुँच पाते, जबकि स्क्रीन पर बिताया जाने वाला निष्क्रिय समय लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में “धड़कन” पहल युवाओं को अपनी सेहत की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित करने का सशक्त माध्यम बन रही है।

अभियान का उद्देश्य छात्रों को हृदय की संरचना एवं कार्यप्रणाली, हृदय रोगों की रोकथाम और प्रारंभिक पहचान, साथ ही पोषण, व्यायाम और जीवनशैली में सुधार के प्रति जागरूक करना है। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हृदय-स्वस्थ पीढ़ी के निर्माण की दिशा में एक सतत प्रयास है।

इस अभियान में महिला महाविद्यालय, गृह विज्ञान विभाग की प्रो. मुक्ता सिंह, प्रो. ललिता वत्ता, कार्डियोलॉजी विभाग की डॉ. प्रतिभा राय, एनाटॉमी विभाग की डॉ. मृण्मयी देब बर्मा, पीएच.डी. शोधार्थी रोशनी गुप्ता, अनामिका गौतम, शिखा पंवार, तथा गृह विज्ञान विभाग की स्नातकोत्तर छात्राएँ आकांक्षा राज, निष्ठा मिश्रा और निधि कुमारी सक्रिय रूप से शामिल हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी