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महिलाओं ने अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए हरितालिका तीज का निराजल व्रत रखा

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महिलाओं ने अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए हरितालिका तीज का निराजल व्रत रखा


—शाम को सोलहों श्रृंगार रचा भगवान शिव और माता पार्वती की कथा सुनेगी,मंगला गौरी के चौखट पर टेका मत्था

वाराणसी,14 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में पति की लंबी आयु (अखंड सुहाग) की कामना को लेकर विवाहित महिलाओं ने पूरे आस्था और उल्लास के साथ सोमवार को हरितालिका तीज का निराजल व्रत रखा। महिलाएं 24 घंटे बाद मंगलवार को इस कठिन व्रत का पारण करेंगी।

भाद्रपद की शुक्ल तृतीया तिथि पर पर्व को लेकर उत्साहित महिलाओं ने भोर से ही स्नान ध्यान के बाद फेनी निगलकर व्रत का संकल्प लिया। पूरे दिन निराजल रहने के बाद शाम को सोलहों श्रृंगार रचा महिलाओं ने पुष्प, धूपदीप व नैवेद्य आदि से भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन की। घरों में शाम को तीज व्रत की कथा का श्रवण किया गया। मिट्टी की बनी शिव, पार्वती और गणपति की पूजा की गई। इसके पहले महिलाओं ने पंचगंगाघाट स्थित माता मंगलागौरी के चौखट पर हाजिरी लगाई। मंदिर के मुख्य दरवाजे को सिर माथे लगा माता से अखंड सुहाग और घर परिवार में सुख समृद्धि के लिए कामना की।

हुकुलगंज नई बस्ती की निशा श्रीवास्तव,मिनाक्षी गुप्ता,मिताली ने बताया कि काफी उत्साह से व्रत रखा है। हमारे घर में यह परम्परा चली आ रही है। व्रत से भगवान शिव और मां पार्वती का आर्शिवाद मिलता है। ज्योतिषविद आचार्य रविन्द्र तिवारी ने बताया कि इस व्रत को सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए किया था। इसी दिन भगवती पार्वती ने व्रत रखकर भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था। इसलिए इस दिन शिव पार्वती की पूजा का विधि विधान है।

इस दिन महिलाएं मंगलागौरी का दर्शन पूजन करती है। नवगौरी मंगलागौरी के दर्शन से अखंड सुहाग,संतान सुख और आरोग्य की प्राप्ति होती है। जिन कन्याओं का जल्दी विवाह नही होता अगर वे माता के दरबार में दर्शन पूजन करती है तो उनके विवाह की बाधाएं दूर होती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी