(अपडेट) वाराणसी : गंगा में मछुआरों के जाल में फंसा दुर्लभ शिवलिंग, दर्शन के लिए उमड़ रही भीड़
— सूजाबाद-डोमरी क्षेत्र में मिला विशाल शिवलिंग, पुरातत्व विभाग ने शुरू की जांच
वाराणसी, 08 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी के सूजाबाद-डोमरी क्षेत्र में गंगा नदी से एक विशाल और दुर्लभ शिवलिंग मिलने की जानकारी ने लोगों में उत्सुकता और श्रद्धा का माहौल बना दिया है। नदी में मछली पकड़ने के दौरान मछुआरों के जाल में यह शिवलिंग फंस गया। भारी वजन के कारण जाल को बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
मछुआरों ने जब जाल को गंगा किनारे खींचकर निकाला तो उसमें विशालकाय शिवलिंग देखकर सभी आश्चर्यचकित रह गए। इसके बाद शिवलिंग को सुरक्षित रूप से बाहर निकालकर गंगा तट स्थित गंगा मंदिर में अस्थायी रूप से स्थापित किया गया। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचने लगे।
मछुआरों के अनुसार शिवलिंग का वजन लगभग दो क्विंटल है। स्थानीय लोगों का अनुमान है कि यह अत्यंत प्राचीन हो सकता है और इसकी आयु करीब 2500 वर्ष तक हो सकती है। हालांकि इसकी वास्तविक प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मछुआरे सुनील साहनी, जितेन्द्र साहनी, बाबू साहनी, गंगा साहनी और आकाश साहनी ने बताया कि रविवार को गंगा में जाल डालने के बाद उसे खींचते समय उन्हें किसी भारी वस्तु के फंसने का एहसास हुआ। जब जाल बाहर निकाला गया तो उसमें शिवलिंग दिखाई दिया। इसे किनारे तक लाने के लिए करीब 15 लोगों को मिलकर प्रयास करना पड़ा।
मछुआरे सुनील साहनी ने बताया कि मामले की सूचना पुरातत्व विभाग को दे दी गई है। सोमवार को विभाग की एक टीम मौके पर पहुंची और शिवलिंग की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी। मछुआरों का कहना है कि विस्तृत परीक्षण और अध्ययन के बाद ही इसकी आयु, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा सांस्कृतिक महत्व के बारे में प्रमाणिक जानकारी सामने आ सकेगी। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि शिवलिंग काफी प्राचीन प्रतीत होता है। फिलहाल इसकी वास्तविकता और ऐतिहासिक महत्व को लेकर सभी की निगाहें पुरातत्व विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

